साइबर अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने धमतरी पुलिस की पहल: पैरालीगल वालेंटियर्स को दिया गया साइबर सुरक्षा एवं डिजिटल अरेस्ट से बचाव का विशेष प्रशिक्षण

फर्जी पुलिस अधिकारी ऑनलाइन ठगी, निवेश फ्रॉड एवं संदिग्ध लिंक से बचाव के बताए गए उपाय, साइबर हेल्पलाइन 1930 की दी गई जानकारी ग्रामीण अंचलों से लेकर शहरी क्षेत्रों तक साइबर जागरूकता का संदेश पहुंचाएंगे पैरालीगल वालेंटियर्स, आमजन को सतर्क एवं जागरूक बनाने पर जोर पुलिस अधीक्षक धमतरी भावना पांडेय के निर्देशन में जिले में साइबर अपराधों की रोकथाम एवं आम नागरिकों को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से लगातार प्रभावी पहल की जा रही है। इसी क्रम में दिनांक 14 अक्टूबर 2026 को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, न्यायालय परिसर धमतरी के सभागार में विभिन्न थानों से जुड़े पैरालीगल वालेंटियर्स (PLVs) के लिए विशेष साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।

कार्यक्रम में साइबर थाना प्रभारी निरीक्षक श्री चंद्रकांत साहू एवं उनकी तकनीकी टीम द्वारा पैरालीगल वालेंटियर्स को वर्तमान में प्रचलित साइबर अपराधों के तौर-तरीकों, अपराधियों द्वारा अपनाई जा रही नई तकनीकों तथा उनसे बचाव के व्यावहारिक उपायों की विस्तृत जानकारी दी गई। साथ ही, प्रशिक्षित वालेंटियर्स को समाज के विभिन्न वर्गों तक साइबर सुरक्षा संबंधी जानकारी पहुंचाने के लिए प्रेरित किया गया।

डिजिटल अरेस्ट एवं ऑनलाइन ठगी के नए तरीकों से किया गया जागरूक

प्रशिक्षण के दौरान डिजिटल अरेस्ट, फर्जी पुलिस अधिकारी बनकर धमकाने, वीडियो कॉल के माध्यम से मानसिक दबाव बनाने,फर्जी निवेश योजनाओं,ऑनलाइन टास्क के नाम पर ठगी तथा बैंक और सिम कार्ड केवाईसी अपडेट के नाम पर होने वाले साइबर अपराधों के संबंध में विस्तार से बताया गया।

प्रतिभागियों को समझाया गया कि पुलिस, सीबीआई, नारकोटिक्स या न्यायालय के नाम पर वीडियो कॉल के जरिए किसी व्यक्ति को डिजिटल अरेस्ट करने की धमकी देकर पैसे वसूलना साइबर ठगी का एक तरीका है। ऐसे मामलों में घबराकर किसी को पैसे न दें अपनी गोपनीय जानकारी साझा न करें तथा तत्काल पुलिस को सूचना दें।

बैंकिंग जानकारी एवं मोबाइल की सुरक्षा पर विशेष जोर

साइबर थाना की टीम ने बताया कि किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ ओटीपी (OTP), यूपीआई पिन (UPI PIN), एटीएम कार्ड नंबर, सीवीवी (CVV) अथवा बैंक खाते से संबंधित गोपनीय जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए। अनजान लिंक पर क्लिक करने, संदिग्ध एपीके (APK) फाइल डाउनलोड करने तथा किसी के कहने पर AnyDesk या TeamViewer जैसे स्क्रीन-शेयरिंग ऐप इंस्टॉल करने से बचना चाहिए।

इसके अलावा, सोशल मीडिया पर फर्जी प्रोफाइल, आकर्षक मुनाफे का लालच देने वाली निवेश योजनाओं तथा घर बैठे कमाई के नाम पर चलाए जा रहे फर्जी ऑनलाइन टास्क से सतर्क रहने की सलाह दी गई।

साइबर ठगी होने पर तत्काल करें शिकायत धमतरी पुलिस द्वारा बताया गया कि साइबर ठगी का शिकार होने पर बिना देरी किए राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें अथवा भारत सरकार के आधिकारिक पोर्टल www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं। त्वरित शिकायत से संबंधित बैंक खाते या लेनदेन पर समय रहते आवश्यक कार्रवाई की संभावना बढ़ जाती है, जिससे ठगी गई राशि को आगे ट्रांसफर होने से रोकने में मदद मिल सकती है।जन-जन तक साइबर सुरक्षा का संदेश पहुंचाने की अपील धमतरी पुलिस ने सभी पैरालीगल वालेंटियर्स से अपील की कि वे अपने कार्यक्षेत्र के ग्रामीण एवं शहरी इलाकों, हाट-बाजारों, स्कूलों, मोहल्लों तथा अन्य सार्वजनिक स्थानों पर आम नागरिकों को साइबर अपराधों के प्रति जागरूक करें। विशेष रूप से महिलाओं विद्यार्थियों, बुजुर्गों और ग्रामीण नागरिकों तक साइबर सुरक्षा संबंधी जानकारी पहुंचाकर उन्हें ऑनलाइन ठगी से बचने के लिए जागरूक एवं सतर्क बनाएं।धमतरी पुलिस आम नागरिकों की डिजिटल सुरक्षा सुनिश्चित करने, साइबर अपराधों की रोकथाम तथा सुरक्षित डिजिटल वातावरण के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है। सतर्क रहें, जागरूक बनें और साइबर अपराधियों के झांसे में आने से बचें

Recent Posts