शिवाजी के स्वाभिमान की हुंकार से गूंज उठा कुरुद, गौरव रथ के स्वागत में उमड़ा जनसैलाब

माँ मातंगी दिव्य धाम बना राष्ट्र चेतना का केंद्र, जय भवानी–जय शिवाजी के उद्घोष से शिवमय हुई धमतरी की धरती कुरुद | धमतरी। धमतरी जिले का कुरुद जीजामगांव 20 फरवरी 2026 को इतिहास, आस्था और राष्ट्रगौरव के अद्भुत संगम का साक्षी बना। नासिक से उड़ीसा के जगन्नाथ पुरी तक आयोजित राष्ट्रीय गौरव यात्रा का पावन गौरव रथ जैसे ही कुरुद पहुँचा, पूरा क्षेत्र जय भवानी–जय शिवाजी के ओजस्वी नारों से गूंज उठा। कुरुद स्थित माँ मातंगी दिव्य धाम में आयोजित इस विराट आयोजन ने यह साबित कर दिया कि छत्रपति शिवाजी महाराज केवल इतिहास नहीं, बल्कि आज भी राष्ट्र चेतना के सबसे सशक्त प्रेरणास्रोत हैं। बिरेझर चौकी से माँ मातंगी धाम तक उमड़ा श्रद्धा का सैलाब 14 फरवरी को नासिक से प्रारंभ हुई गौरव यात्रा, जगन्नाथ पुरी में शिव जन्मोत्सव संपन्न कर वापसी मार्ग में छत्तीसगढ़ पहुँची। 20 फरवरी की सुबह बिरेझर चौकी के समीप रथ के दर्शन होते ही श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर पहुँच गया। सायं 5 बजे माँ मातंगी दिव्य धाम में वैदिक मंत्रोच्चार, पूजन और आरती के साथ रथ का भव्य स्वागत किया गया। शिव–शक्ति की बारात बनी आकर्षण का केंद्र गौरव रथ के साथ निकली विराट शोभायात्रा ने पूरे कुरुद को केसरिया रंग में रंग दिया। भोलेबाबा–माँ पार्वती स्वरूप, नंदी पर सवार बारात, भूत–प्रेत गणों की झांकियाँ और हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने इस आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया। माँ मातंगी दरबार से एनएच–30 तक निकली यह शोभायात्रा सायं 5 बजे से रात्रि 1 बजे तक चले धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ संपन्न हुई। सांस्कृतिक जागरण का संकल्प, सरकार से अहम मांग आयोजनकर्ता छावा भारत क्रांति मिशन ने शिवाजी महाराज की जीवनी को शैक्षणिक पाठ्यक्रम में शामिल करने तथा शिवाजी जयंती को राष्ट्रीय गौरव दिवस घोषित करने की मांग रखी। संस्था का कहना है कि यह आयोजन केवल उत्सव नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और वैचारिक जागरण का अभियान है। सनातन की रक्षा का श्रेय शिवाजी को’ — डॉ. प्रेमा साईं महाराज माँ मातंगी दिव्य धाम के पीठाधीश्वर डॉ. प्रेमा साईं महाराज ने कहा कि यदि आज भारत की मंदिर परंपराएँ और संस्कृति सुरक्षित हैं, तो उसका बड़ा श्रेय छत्रपति शिवाजी महाराज के त्याग और पराक्रम को जाता है। नई पीढ़ी को उनके विचारों और बलिदान से प्रेरणा लेनी चाहिए। भक्ति संगीत से गूंजा कुरुद रात्रि 7 बजे से छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध भजन एवं जस गीत सम्राट दुकालू यादव की संगीतमय प्रस्तुति ने माहौल को भक्तिमय बना दिया। भक्ति गीतों पर श्रद्धालु देर रात तक झूमते रहे। देशभर से आए संत, जनप्रतिनिधि और गणमान्य कार्यक्रम में संतों, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों के प्रमुख पदाधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। माँ मातंगी दिव्य धाम की ओर से सभी अतिथियों का शाल, श्रीफल एवं स्मृति-चिन्ह भेंट कर सम्मान किया गया। केवल आयोजन नहीं, राष्ट्र चेतना की हुंकार कुरुद की धरती से उठी यह आवाज सिर्फ एक दिन की नहीं, बल्कि उस विचार की है जो धर्म, संस्कृति और राष्ट्रगौरव को एक सूत्र में पिरोता है। गौरव रथ आगे बढ़ चुका है, लेकिन शिवाजी के स्वाभिमान की यह हुंकार कुरुद और धमतरी में लंबे समय तक गूंजती रहेगी।

Recent Posts