
“शराब के नशे में ट्रक रिवर्स कर महिला को कुचला, चालक को 2 साल का कारावास”

बालोद – जिला एवं सेशन न्यायालय बालोद के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (एफटीसी) श्रीमान ताजुद्दीन आसिफ, के द्वारा आरोपी लेखराम ठाकुर आ० झगरू राम ठाकुर, उम्र 45 वर्ष, साकिन-मेंढ़की, थाना-बालोद, जिला-बालोद (छ.ग.) को धारा 185 मोटरयान अधिनियम के आरोप में 10,000/- अर्थदण्ड तथा भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 106 (1) के आरोप में 02 वर्ष के सश्रम कारावास, व 5,000/- अर्थदण्ड से दण्डित किया गया। समुचित जांच उपरांत आदेश/निर्णय प्राप्ति दिनाक से दो माह की अवधि के भीतर पीड़ित क्षतिपूर्ति योजना, 2018 के अंतर्गत पीड़ित क्षतिपूर्ति निधि से मृतिका के विधिक वारिसान को पर्याप्त प्रतिकर प्रदान करने हेतु माननीय न्यायालय द्वारा सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बालोद को निर्देशित किया गया है।
अभियोजन की ओर से प्रकरण की पैरवी सनद कुमार श्रीवास्तव, अतिरिक्त लोक अभियोजक के द्वारा किया गया, जिसके अनुसार-प्रार्थी हिमांशु साहू दिनांक 29/11/2025 को थाना-बालोद में उपस्थित होकर इस आशय की लिखित शिकायत पेश की, कि दिनांक 29-11-2025 को समय 12:00 बजे उसकी दादी ग्राम मेढ़की में आयोजित ग्राम सभा की बैठक में शामिल होने के लिए घर से निकली थी। उसकी दादी धीरे-धीरे करीबन 01:00 बजे ग्राम मेढ़की चौक के पास पहुंची थी, उसी समय ट्रक क्रमांक CG 08 AF 8199 के चालक / अभियुक्त ने अपनी वाहन को आवासीय एवं भीड़-भाड़ वाले क्षेत्र में चलाते हुए ले जाकर उसकी दादी को ठोकर मार दी, जिससे उसकी दादी ट्रक के नीचे आ गई, जब आसपास के लोगों ने ट्रक को रोकने के लिए आवाज लगायी, तब अभियुक्त ने ट्रक रोककर उसे रिवर्स किया, जिससे उसकी दादी ट्रक के नीचे दब गई। अभियुक्त ट्रक द्वारा उसकी दादी को कुछ दूर घसीटते हुए ले गया, जिससे उसकी दादी के शरीर में गंभीर चोंट लगने से मृत्यु हो गयी। प्रार्थी हिमांशु साहू की उक्त लिखित शिकायत के आधार पर अभियुक्त के विरूद्ध थाना बालोद में अपराध क्रमांक-523/2025, भारतीय न्याय संहिता की धारा-105 के अंतर्गत प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज किया गया। सम्पूर्ण विवेचना उपरांत अभियुक्त के विरूद्ध भारतीय न्याय संहिता की धारा-105 एवं धारा 185 एम.व्ही.एक्ट के अंतर्गत अभियोग पत्र पेश किया गया। प्रकरण में आये प्रबल एवं ठोस साक्ष्य के आधार पर माननीय न्यायालय ने आरोपी को उक्त दण्ड से दण्डित किया गया। प्रकरण की सम्पूर्ण विवेचना प्र.आ.1732- योगेश सिन्हा के द्वारा किया गया।






