राज्य सरकार और जिला प्रशासन मिलकर किसान के साथ चोरों जैसा व्यवहार किया जा रहा है, किसान कम से कम धान बेचे इसलिए धान के लिए किसी भी समय बिना किसी सूचना के किसान के घर में धान की तलाशी की जा रही है, जगह के आभाव में किसान धान को अपनी सुविधा के अनुसार किसी और के घर या ब्यारह में रखता है, प्रशासन उसे उसका धान मानने को तैयार नहीं, ऐन केन प्रक्कारेण किसान को प्रताड़ित करने का काम किया जा रहा है, जबरदस्ती समर्पण फॉर्म भरने के लिए किसान पर दबाव बनाया जा रहा है, प्रशासन कर रही किसानों के साथ चोरों और अपराधियों की तरह बर्ताव, ये मेहनतकश अन्नादाता का अपमान है, ये व्यवहार बीजेपी की किसानों प्रति दुर्भावना का प्रत्यक्ष प्रमाण है, किसी ना किसी बहाने किसानों को प्रताड़ित किया जा रहा है।







