गर्मी बढ़ने के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट गहराने लगा है। इस संबंध में जिला कांग्रेस अध्यक्ष तारिणी चंद्राकर ने कहा कि धमतरी जिले के कई गांवों में तालाब, नदी और नाले सूखने लगे हैं, जिससे निस्तारी और पेयजल की समस्या गंभीर होती जा रही है। गांवों में लोगों की प्यास बुझाने वाले हैंडपंप भी अब जवाब देने लगे हैं। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में जलस्तर तक नीचे चला गया है। इतनी गहराई से पानी निकालना हैंडपंपों के लिए संभव नहीं रह गया है। पानी की तलाश में लोग लगातार नए नलकूप खुदवा रहे हैं, तारिणी चंद्राकर ने कहा कि गर्मी का अधिकांश समय अभी बाकी है। यदि समय रहते जल संकट पर काबू नहीं पाया गया तो आने वाले दिनों में कई गांवों में स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है। धमतरी जिले के अनेक गांव में गहराते पेयजल संकट ने आम जनता का जीवन अत्यंत कठिन बना दिया है। ग्रामीण इलाकों में लोगों को स्वच्छ पेयजल के लिए इधर उधर भटकना पड़ रहा है, जो कि अत्यंत चिंताजनक स्थिति है। केंद्र सरकार द्वारा बड़े प्रचार प्रसार के साथ शुरू किया गया जल जीवन मिशन आज जमीनी स्तर पर अपनी अपेक्षाओं पर खरा उतरता दिखाई नहीं दे रहा है। साथ ही साय सरकार के द्वारा जल संरक्षण के नाम पर शासकीय धन का दुरुपयोग करते हुए जल जगार जैसे राष्ट्रीय इवेंट का आयोजन किया गया जिस क्षेत्र में यह आयोजन हुआ आज वहीं क्षेत्र पेयजल जैसी गंभीर समस्याओ की संकट से गुजर रही है. तत्कालीन समय में कांग्रेस ने सरकार की इस इवेंटबाजी नीति का पुर-जोर विरोध करते हुए जमीनी स्तर पर कार्य करने आगाह किया था लेकिन प्रदेश में मोदी की गारंटी पर चलने वाली साय सरकार को इवेंट बाजी के अलावा और कुछ दिखाई नही देता. जल जीवन मिशन के तहत कई गांवों में पाइपलाइन तो बिछा दी गई है, परंतु नियमित रूप से पानी की आपूर्ति नहीं हो रही है। कई गांवों में नलकूप खनन ही नहीं हो पाया है, तो कहीं जल स्रोत ही नहीं मिल पा रहा है बिना पानी के टंकिया अब गांवों में शो पीस के तौर पर नजर आ रही हैं। तारिणी चंद्राकर ने आगे कहा कि पेयजल जैसी मूलभूत आवश्यकता को राजनीति से ऊपर उठकर देखा जाना चाहिए। सरकार को चाहिए कि वह इस मुद्दे पर तत्काल ठोस कदम उठाए, जल स्रोतों के संरक्षण पर ध्यान दे तथा योजनाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करें।






