सफलता की कहानी प्रहलाद सिंह की मेहनत और अर्दन चेकडेम का संगम से बदली गांव की तकदीर।

एमसीबी/07 नवम्बर 2025/ छत्तीसगढ़ राज्य के मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के मनेन्द्रगढ़ ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत बाला के किसान प्रहलाद सिंह की कहानी मेहनत, लगन और आत्मनिर्भरता की मिसाल है। कभी उनके खेतों में सूखा और बंजरपन फैला रहता था। पानी की कमी के कारण भूमि अनुपजाऊ बनी हुई थी और खेती करना मुश्किल था। इसी समस्या को देखते हुए ग्राम पंचायत बाला के कलश बोथा नाला पर अर्दन चेक डेम निर्माण कार्य की स्वीकृति 2.28 लाख रुपये की राशि से दी गई। इस स्वीकृति राशि ने ग्रामीणों के जीवन में विकास की नई धारा प्रवाहित कर दी। यह डेम केवल एक निर्माण कार्य नहीं, बल्कि ग्रामीण आशा, मेहनत और परिवर्तन का प्रतीक बन गया।

चेक डेम से बदली प्रहलाद सिंह की तकदीर, खेतों में आई हरियाली

अर्दन चेक डेम निर्माण से पहले खेती पूरी तरह वर्षा पर निर्भर थी। बरसात के बाद खेत सूख जाते थे, जिससे उत्पादन घट जाता था और किसान आर्थिक तंगी से जूझते थे। लेकिन डेम बनने के बाद स्थिति पूरी तरह बदल गई। प्रहलाद सिंह ने चेक डेम के पानी से सिंचाई कर अपने खेतों को उपजाऊ बनाया। आज वे धान, गेहूं के साथ-साथ आलू, मटर, टमाटर, गोभी, बैंगन, मिर्ची और हरी सब्जियों की भरपूर खेती कर रहे हैं। उनके खेतों में अब सालभर हरियाली रहती है और फसलें लहलहाती हैं। यह बदलाव केवल खेतों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उनके जीवन में आत्मनिर्भरता और समृद्धि की नई रोशनी लेकर आया।

पानी से उपजा विश्वास और आत्मनिर्भरता की कहानी
जब कलश बोथा नाला पर डेम निर्माण हुआ, तब ग्रामीणों के चेहरों पर उम्मीद की नई चमक दिखी। प्रहलाद सिंह ने इसे अपनी मेहनत से साकार कर दिखाया। उन्होंने अपने खेत में इस पानी का सही उपयोग किया और पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर सब्जी उत्पादन शुरू किया। पहले जहाँ केवल एक फसल ली जाती थी, अब वे दो से तीन फसलें लेने लगे हैं। उनकी सालाना आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। पहले वे मनरेगा के अकुशल श्रम पर निर्भर रहते थे, लेकिन अब वे अपनी मेहनत और खेती के बल पर आत्मनिर्भर किसान बन चुके हैं। वे गर्व से कहते हैं कि अब हमारे खेतों में न केवल पानी है, बल्कि हमारी मेहनत की हरियाली भी दिखती है।

मेहनत और मनरेगा की संगति से प्रहलाद सिंह बने नई मिसाल
मनरेगा योजना के अंतर्गत इस अर्दन चेक डेम का निर्माण सामुदायिक सहयोग और ग्रामीण श्रमशक्ति का प्रतीक है। ग्राम पंचायत बाला और जनपद पंचायत मनेन्द्रगढ़ के समन्वय से यह कार्य समय पर पूरा हुआ। ग्रामीणों ने इस कार्य में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। मजदूरी के साथ-साथ उन्होंने गुणवत्ता पर भी ध्यान दिया ताकि डेम लंबे समय तक टिक सके। इस सामूहिक प्रयास ने ग्रामीणों को आत्मगौरव से भर दिया। अब गांव के हर किसान को यह विश्वास है कि यदि एकजुट होकर काम किया जाए, तो हर कठिनाई पर विजय प्राप्त की जा सकती है।

प्रहलाद सिंह की जल संरक्षण से समृद्धि तक की प्रेरणादायक यात्रा
अर्दन चेक डेम के जल से सिंचित होकर प्रहलाद सिंह ने अपने खेतों को उत्पादन केंद्र में बदल दिया है। उन्होंने लगभग एक एकड़ भूमि पर सब्जियों की खेती की और अब तक 25 हजार रुपये से अधिक का उत्पादन कर चुके हैं। इस आय ने उनके परिवार को आर्थिक स्थिरता दी है। पहले जो किसान सीमित संसाधनों में गुज़ारा करता था, आज वही दूसरों को प्रेरित कर रहा है। उनके खेत अब गांव के अन्य किसानों के लिए “प्रेरणा स्थल” बन चुके हैं, जहाँ वे सीखने आते हैं कि मेहनत और सही दिशा से जीवन कैसे बदला जा सकता है।

गांव में फैली प्रेरणा और विकास की नई लहर
आज ग्राम पंचायत बाला के अधिकांश किसान इस चेक डेम से सिंचाई सुविधा प्राप्त कर उन्नत खेती कर रहे हैं। महिलाओं ने भी रसोई के लिए सब्जियां उगाना शुरू कर दिया है। गांव में आत्मनिर्भरता का भाव बढ़ा है और रोजगार के नए अवसर बने हैं। बच्चों के चेहरे पर मुस्कान है क्योंकि अब उनके परिवारों की आमदनी स्थिर हो चुकी है। मनरेगा के इस कार्य ने दिखा दिया कि जल संरक्षण के प्रयास न केवल खेतों में फसल उगाते हैं, बल्कि उम्मीद, सम्मान और आत्मविश्वास के बीज भी बोते हैं।
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