नवीन शासकीय कन्या महाविद्यालय मनेंद्रगढ़ में रजत जयंती महोत्सव पर राज्य स्तरीय संगोष्ठी एवं दीक्षारंभ कार्यक्रम।

“ज्ञान, संस्कृति और आत्मविश्वास से रचेगा छत्तीसगढ़ का उज्ज्वल भविष्य”
 
संसाधनों की कमी हो सकती है पर आपकी साधना में कमी नहीं होनी चाहिए…गिरीज पंकज
 
छत्तीसगढ़ राज्य केवल अन्नगर्भा नहीं है बल्कि रत्नगर्भा भी है…रश्मि सोनकर
 
एमसीबी/12 सितंबर 2025/ – नवीन शासकीय कन्या महाविद्यालय मनेंद्रगढ़ में छत्तीसगढ़ राज्य की रजत जयंती महोत्सव 2025 के अवसर पर एक दिवसीय राज्य स्तरीय संगोष्ठी और दीक्षारंभ कार्यक्रम का भव्य आयोजन हुआ, जिसका विषय “कल, आज और कल” रखा गया। समारोह का शुभारंभ भारतमाता, मां सरस्वती और छत्तीसगढ़ महतारी के चित्र पर दीप प्रज्वलन से हुआ, जिसके बाद छात्राओं ने छत्तीसगढ़ महतारी की आरती कर पूरे वातावरण को परंपरा, संस्कृति और गौरव से भर दिया। इस अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार एवं पत्रकार गिरीश पंकज, महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. रामकिंकर पाण्डेय, विशिष्ट जनप्रतिनिधि और अतिथि उपस्थित रहे जिनका पुष्पगुच्छ भेंट कर आत्मीय स्वागत किया गया। नव प्रवेशी छात्राओं का पारंपरिक चंदन तिलक लगाकर अभिनंदन किया गया। जिससे उनकी नई शैक्षणिक यात्रा का विशेष महत्व प्राप्त हुआ। कार्यक्रम का संचालन संयोजक एवं इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ. वर्षा तिवारी ने कुशलतापूर्वक किया। प्राचार्य डॉ. पाण्डेय ने अपने उद्बोधन में कहा कि बेटियों की शिक्षा ही समाज की असली ताकत है और कल्पना चावला जैसी विभूतियाँ इसका प्रेरक उदाहरण हैं।
उन्होंने महाविद्यालय की प्रगति का उल्लेख करते हुए बताया कि वर्ष 2023 में लेदरी से मात्र 9 छात्राओं के साथ प्रारंभ हुआ। यह संस्थान आज तीसरे वर्ष में प्रवेश कर 52 छात्राओं को शिक्षा प्रदान कर रहा है और अमली गोलाई में इसके लिए भव्य कैंपस हेतु भूमि आवंटित हो चुकी है। संगोष्ठी के प्रमुख वक्ताओं में नीलू जायसवाल ने कहा कि आने वाला कल संघर्ष और परंपरा की धरोहर है, आज उपलब्धियों का प्रतीक है और भविष्य हमारी जिम्मेदारी है, वहीं धर्मेंद्र पटवा ने शिक्षा को समाज और राष्ट्र की दिशा बदलने वाली शक्ति बताया तथा राज्य सरकार के विजन 2027 का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास को नई ऊँचाइयों तक ले जाने का संकल्प ही छात्राओं का भविष्य उज्ज्वल करेगा। छत्तीसगढ़ राज्य केवल अन्नगर्भा नहीं है बल्कि रत्नगर्भा भी है। रश्मि सोनकर ने गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ केवल धान का कटोरा ही नहीं बल्कि शिक्षा और संस्कृति और खनिजों की धनी भूमि है और आज छात्राओं को आत्मनिर्भरता तथा आधुनिकता के साथ समाज में अपनी पहचान बनानी होगी। इसी क्रम में वीरेंद्र श्रीवास्तव ने छात्राओं की शिक्षा को जीवन की असली दिशा बताते हुए विश्वास जताया कि हमारी बेटियाँ न केवल पढ़ाई बल्कि साहित्य, लेखन और रचनात्मकता में भी अपनी प्रतिभा से जिले और राज्य का नाम रोशन करेंगी।
उन्होंने कहा कि मनेंद्रगढ़ की धरती शिक्षा, प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक धरोहर की धनी है। यहाँ की हरी-भरी वादियाँ, पहाड़, झरने और हरचौका, हसदेव नदी से लेकर लगभग 29 करोड़ वर्ष पुराने गोंडवाना मरीन फॉसिल्स पार्क तक की ऐतिहासिक और वैज्ञानिक महत्ता हमारे जिले को छत्तीसगढ़ का अनमोल रत्न बनाती है। उन्होंने कहा कि मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिला अपनी संस्कृति, प्राकृतिक सुंदरता और युवाओं की प्रतिभा के बल पर आने वाले समय में पूरे प्रदेश के लिए एक आदर्श उदाहरण बनेगा। इस संगोष्ठी ने न केवल छात्राओं को शिक्षा, संस्कृति और महिला सशक्तिकरण का महत्व समझाया बल्कि आत्मविश्वास, परिश्रम और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश भी दिया। कार्यक्रम का समापन छत्तीसगढ़ को शिक्षा, संस्कृति और विकास में अग्रणी राज्य बनाने के संकल्प के साथ हुआ, जिसने न केवल महाविद्यालय बल्कि पूरे जिले को गौरव और ऊर्जा से आलोकित कर दिया। प्रोफेसर श्रावणी चक्रवर्ती ने कहा कि मैं आपसे यही कहना चाहती हूँ कि शिक्षा ही आपकी सबसे बड़ी ताकत है। यह आपको ज्ञान देती है, आत्मविश्वास देती है और जीवन को सही दिशा देती है। लेकिन केवल पढ़ाई ही काफी नहीं, उसमें हुनर और जज़्बा भी जरूरी है। हुनर आपकी प्रतिभा है और जज़्बा वह शक्ति है, जो आपको कठिनाइयों के बावजूद आगे बढ़ाता है। प्रिय छात्राओं आप अपने सपनों को छोटा मत कीजिए। आत्मविश्वास के साथ मेहनत कीजिए, अपने हुनर को निखारिए और जज़्बे के साथ आगे बढ़िए। कल का छत्तीसगढ़ और भारत आपकी मेहनत और आपकी सफलता पर ही गर्व करेगा।
वहीं मुख्य वक्ता वरिष्ठ साहित्यकार और पत्रकार गिरीश पंकज ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा जीवन को दिशा देने वाली सबसे बड़ी पूँजी है, इसलिए इसका भरपूर लाभ उठाना चाहिए। उन्होंने छात्रों से कहा संसाधनों की कमी हो सकती है पर आपकी साधना में कमी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि उन्होंने स्वयं भी संसाधनों के अभाव में शिक्षा पाई और संघर्ष का सामना किया, लेकिन यही संघर्ष आगे चलकर प्रेरणा बना। आज जब महाविद्यालय के लिए भूमि आवंटित हो चुकी है, तो जल्द ही भव्य कैंपस बनेगा और वर्तमान की कठिनाइयाँ समाप्त होंगी। उन्होंने “कल, आज और कल” विषय पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की परिकल्पना ठाकुर प्यारेलाल, खूबचंद बघेल और सुंदरलाल शर्मा जैसे नेताओं ने 125 वर्ष पहले ही कर ली थी। रतनपुर से लेकर रायपुर संभाग तक के संघर्ष ने यह साबित किया कि बिना खून-खराबे के भी एक राज्य का निर्माण संभव है और यही छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी ताकत है। आज छत्तीसगढ़ विकास की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है और शिक्षा इसका सबसे मजबूत स्तंभ है।
उन्होंने छात्राओं से कहा कि आने वाले समय में यहीं से डॉक्टर, अधिकारी, शिक्षक, लेखक और साहित्यकार निकलेंगे जो जिले और प्रदेश की पहचान को नई ऊँचाइयों तक ले जाएंगे। उन्होंने विजन 2047 का उल्लेख करते हुए कहा कि जब भारत अपनी स्वतंत्रता की शताब्दी मना रहा होगा तब छत्तीसगढ़ भी पूरी तरह विकसित राज्य बन चुका होगा और एमसीबी जिला अब शिक्षा, संस्कृति और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में पूरे देश के लिए आदर्श बनेगा।
उन्होंने छात्राओं को आधुनिकता की अंधी दौड़ से दूर रहते हुए अपनी संस्कृति और मूल्यों को संजोने की सलाह दी। साथ ही नशे, फास्ट फैशन और सोशल मीडिया के दुरुपयोग से बचने की अपील की। अंत में उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण, नदियों की स्वच्छता और हरियाली को बचाकर ही हम विकसित छत्तीसगढ़, विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को साकार कर पाएंगे।
इस अवसर पर साहित्य जगत से सतीश उपाध्याय और व्यंग्यकार-साहित्यकार जगदीश पाठक की गरिमामयी उपस्थिति रही। साथ ही शिक्षा क्षेत्र से सहायक प्राध्यापक (भौतिक शास्त्र) सुनील गुप्ता, सभाजीत यादव, रंजीत पटेल, गौरव गुप्ता, दिलीप जायसवाल, महेंद्रपाल सिंह, रोहित वर्मा, आलोक जायसवाल, व्रिजेश अग्रवाल, सुनील सोनकर, माया सोनकर, ओमप्रकाश जायसवाल, मुन्नालाल जायसवाल, सुशीला सिंह, सपन महतो और सुनैना विश्वकर्मा सहित महाविद्यालय की सभी छात्राएँ और शिक्षकगण भी बड़ी संख्या में मौजूद रहे।
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