
*दल्लीराजहरा में अकीदत व एहतराम के साथ मनाया गया जश्ने ईद मिलादुन्नबी, निकला जुलूसे मोहम्मदी*

दल्लीराजहरा :–बालोद जिले के अंतर्गत दल्ली राजहंरा मे हुजूर-ए-अकरम, रहमतुल्लिल आलमीन हजरत मोहम्मद मुस्तफा की यौमे पैदाइश के मुबारक मौके पर आलमें इस्लाम जामा मस्जिद कमेटी, दल्लीराजहरा की जानिब से हर साल की तरह इस साल भी जामा मस्जिद दल्लीराजहरा में जश्ने ईद मिलादुन्नबी का आयोजन अकीदत, मोहब्बत और एहतराम के साथ किया गया। इस मुबारक मौके पर तकरीर, कुरआन ख्वानी, दुरूद-ओ-सलाम, जुलूसे मोहम्मदी और आम लंगर का एहतमाम किया गया।
जश्ने ईद मिलादुन्नबी की शुरुआत परचम कुशाई की रस्म से हुई। रविवार को दोपहर 2 बजे जामा मस्जिद में मस्तूरात के लिए कुरआन ख्वानी और दुरूद ख्वानी का आयोजन किया गया। इस दौरान हजरत नौमान मियां की नूरानी तकरीर हुई, जिसे सुनकर मौजूद लोगों ने दिली सुकून हासिल किया। मस्तूरात के लिए पर्दे का भी खास इंतजाम किया गया।
इसके बाद जुलूसे मोहम्मदी पूरी अकीदत और जोश के साथ निकाला गया। जुलूस में बड़ी तादाद में आशिकाने रसूल ने शिरकत की और नात-ओ-सना के जरिए अपनी मोहब्बत और अकीदत का इजहार किया। इस दौरान मशहूर सना ख्वां ने भी नातिया कलाम पेश कर माहौल को रूहानी बना दिया।

24 अगस्त 2026, सोमवार को बाद नमाज-ए-ईशा उलमा-ए-किराम की तकरीर का आयोजन हुआ। इसमें मेहमाने खुसूसी नबीर-ए-उस्तादे जमन, शहजादे हुजूर अमीने शरीयत, गुलाम-ए-मौला उमर, हजरत अल्लामा मौलाना अल्हाज अश्शाह नोमान रजा खान साहब किबला (बरेली शरीफ), मददाहे रसूल हजरत हाफिज व कारी अब्दुल बशीर साहब, इमाम व खतीब जामा मस्जिद दल्लीराजहरा, शहनशाह-ए-तरन्नुम हजरत मौलाना हकीक अहमद नूरी साहब नायब इमाम मस्जिद तथा मददाहे खैरुल अनाम हजरत हाफिज व कारी गुलाम सिमनानी रिजवी साहब, मुदर्रिस मदरसा दारुल उलूम इमाम-ए-आजम दल्लीराजहरा ने अपनी तकरीर पेश की।
उलमा-ए-किराम ने अपनी तकरीर में हुजूर-ए-अकरम हजरत मोहम्मद मुस्तफा की सीरत-ए-पाक और उनके पैगाम पर रोशनी डालते हुए कहा कि आप पूरी इंसानियत के लिए रहमत बनकर दुनिया में तशरीफ लाए। आपने इंसान को इज्जत, बराबरी, इंसाफ, रहमदिली, सच्चाई और नेक अमल का रास्ता दिखाया।
उन्होंने कहा कि नबी-ए-करीम ने नफरत के बदले मोहब्बत, दुश्मनी के बदले भाईचारा, जुल्म के बदले इंसाफ और बुराई के बदले नेकी का पैगाम दिया। आपकी पूरी जिंदगी इंसानियत, रहमत, सब्र, माफी और बेहतरीन अखलाक का मुबारक नमूना है। ईद मिलादुन्नबी मनाने का असल मकसद केवल खुशी का इजहार करना नहीं, बल्कि सीरत-ए-मुस्तफा को अपनी जिंदगी में उतारना और उनके बताए रास्ते पर चलने का अहद करना है।
कार्यक्रम के दौरान आम लंगर का भी आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने शिरकत की। जश्ने ईद मिलादुन्नबी के तमाम कार्यक्रम जामा मस्जिद कमेटी के सदर नय्यूम खान एवं कमेटी के सदस्यों तथा जमातियों के सहयोग से कामयाबी के साथ संपन्न हुए।






