विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते की कुर्सी पर संकट के बादल!

जाति प्रमाण पत्र मामले में हाईकोर्ट सख्त, 4 माह के भीतर कार्रवाई के निर्देश

प्रतापपुर विधानसभा की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आने की संभावना बन गई है। भाजपा विधायक श्रीमती शकुंतला सिंह पोर्ते के जाति प्रमाण पत्र विवाद ने अब गंभीर कानूनी मोड़ ले लिया है। मामले में माननीय उच्च न्यायालय ने सख्त रुख अपनाते हुए संबंधित अधिकारियों को चार माह के भीतर कार्रवाई पूरी करने के निर्देश दिए हैं।

जानकारी के अनुसार विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते के जाति प्रमाण पत्र को लेकर लंबे समय से विवाद चला आ रहा है। आरोप है कि उन्होंने निर्वाचन प्रक्रिया में जिस जाति प्रमाण पत्र के आधार पर चुनाव लड़ा और विधायक निर्वाचित हुईं, उसकी वैधता पर सवाल खड़े किए गए हैं। याचिकाकर्ता का दावा है कि विधायक द्वारा प्रस्तुत जाति प्रमाण पत्र विवादित है तथा उसके समर्थन में आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं।

मामले की जांच उच्च न्यायालय के निर्देश पर जिला स्तरीय जाति प्रमाण पत्र सत्यापन समिति द्वारा की जा रही है। सूत्रों के अनुसार समिति ने कई बार संबंधित अभिलेखों की मांग की। विभिन्न विभागों एवं अधिकारियों से लिखित रूप में दस्तावेज मंगाए गए, लेकिन कथित रूप से जाति प्रमाण पत्र के समर्थन में अपेक्षित रिकॉर्ड प्राप्त नहीं हो सके। वहीं विधायक पक्ष को भी कई नोटिस जारी कर आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए कहा गया, किंतु अब तक संतोषजनक अभिलेख प्रस्तुत नहीं किए जाने की बात सामने आ रही है। इसी बीच प्रकरण में कार्रवाई में हो रही देरी को लेकर याचिकाकर्ता ने माननीय उच्च न्यायालय में अवमानना याचिका दायर की। अवमानना प्रकरण क्रमांक 715/2026 पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने मामले को गंभीरता से लिया और कलेक्टर बलरामपुर सहित अनुसूचितp जनजाति उच्च स्तरीय छानबीन समिति के सचिव को नोटिस जारी किया। न्यायालय ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जाति प्रमाण पत्र संबंधी प्रकरण का निराकरण चार माह के भीतर किया जाए।अब राजनीतिक गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि जांच में विधायक का जाति प्रमाण पत्र अमान्य पाया जाता है तो प्रतापपुर विधानसभा की तस्वीर क्या होगी? क्या क्षेत्र को मध्यावधि चुनाव का सामना करना पड़ेगा? क्या भाजपा को अपने गढ़ को बचाने के लिए नई रणनीति बनानी पड़ेगी? इन सवालों ने क्षेत्र की राजनीति को गर्मा दिया है।विपक्ष भी इस मुद्दे को लेकर लगातार हमलावर बना हुआ है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले चार महीने प्रतापपुर विधानसभा की राजनीति की दिशा और दशा तय कर सकते हैं। यदि जांच रिपोर्ट विधायक के खिलाफ जाती है तो यह न केवल उनकी राजनीतिक पारी के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है, बल्कि पूरे क्षेत्र की राजनीतिक समीकरणों को भी बदल सकता है।फिलहाल सभी की निगाहें उच्च न्यायालय के निर्देशों के तहत चल रही जांच प्रक्रिया पर टिकी हुई हैं। अब देखना होगा कि चार माह बाद आने वाला फैसला प्रतापपुर विधानसभा की राजनीति में नया अध्याय लिखता है या फिर विधायक को राहत मिलती है।

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