संगठन में ही शक्ति है, और जागरूक समाज ही प्रगति का असली हकदार होता है। किसी भी समाज की पहचान इस बात से नहीं होती कि उसका इतिहास कितना गौरवशाली रहा है, बल्कि इससे होती है कि वर्तमान में वह अपने भविष्य को संवारने के लिए कितने प्रयास कर रहा है।धमतरी के जालमपुर में हुई लोधी समाज की हालिया बैठक इसी दिशा में एक सराहनीय और दूरदर्शी कदम है। आज के बदलते दौर में समाज के उत्थान के लिए दो बातें सबसे महत्वपूर्ण हैं: जागरूकता और जुड़ाव। 1. शिक्षा और आर्थिक स्वावलंबन से उत्थान लोधी समाज हमेशा से अपनी मेहनत और स्वाभिमान के लिए जाना जाता रहा है। लेकिन आज के तकनीकी युग में यदि हमें मुख्यधारा में मजबूती से खड़े होना है, तो हमारे युवाओं को शिक्षा और रोजगार के नए अवसरों से जुड़ना होगा। समाज के समृद्ध और सक्षम लोगों की यह जिम्मेदारी है कि वे आर्थिक रूप से कमजोर प्रतिभावान छात्रों का हाथ थामें। 2.बिखराव को छोड़ जुड़ाव का संकल्प जब तक समाज का हर व्यक्ति एक-दूसरे के सुख-दुख में खड़ा नहीं होगा, तब तक सामाजिक विकास की कल्पना अधूरी है। जालमपुर की बैठक का मूल मंत्र भी यही था कि हर घर, हर व्यक्ति तक पहुंच बनाई जाए। जब समाज के लोग आपस में जुड़ते हैं, तो एक ऐसा सुरक्षा कवच बनता है जो समाज के अंतिम व्यक्ति को भी लावारिस होने का अहसास नहीं होने देता। 3 कुरुतियों का त्याग और आधुनिक सोच, उत्थान का मतलब सिर्फ आर्थिक तरक्की नहीं, बल्कि वैचारिक तरक्की भी है। विवाह और अन्य सामाजिक आयोजनों में फिजूलखर्ची को कम करना, युवाओं को नशे की लत से बचाना और महिलाओं को समाज के निर्णयों में बराबर की भागीदारी देना ही वास्तविक सुधार है। निष्कर्ष: जालमपुर में जलाई गई यह सामाजिक चेतना की मशाल बुझनी नहीं चाहिए। यह बैठक केवल एक दिन का आयोजन बनकर न रह जाए, बल्कि यहाँ लिए गए निर्णयों को धरातल पर उतारने के लिए हर लोधी बंधु को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। आइए, हम सब मिलकर एक शिक्षित, संगठित और आत्मनिर्भर लोधी समाज का निर्माण करें।






