
तांदुला नदी के कायाकल्प की शुरुआत, ड्रोन सर्वे से बनेगी इको-रिवरफ्रंट योजना

बालोद :–जिले की जीवनदायिनी तांदुला नदी के पुनर्जीवन और सौंदर्यीकरण की दिशा में जिला प्रशासन बालोद ने बड़ा कदम उठाया है। जिला प्रशासन एवं भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान भिलाई की साझेदारी में तांदुला नदी के पुनरुद्धार हेतु यूएवी ड्रोन सर्वेक्षण कार्य का आज विधिवत शुभारंभ किया गया।
तांदुला जलाशय के समीप ग्राम देउरतराई मैदान में आयोजित कार्यक्रम में नगर पालिका परिषद बालोद की अध्यक्ष प्रतिभा चौधरी, अपर कलेक्टर चंद्रकांत कौशिक, एसडीएम नूतन कंवर, जल संसाधन विभाग के कार्यपालन अभियंता पीयूष देवांगन सहित जनप्रतिनिधि, ग्रामीणजन और आईआईटी भिलाई के विशेषज्ञ उपस्थित रहे। अतिथियों ने ड्रोन की पूजा-अर्चना कर सर्वे कार्य का शुभारंभ किया।

परियोजना के तहत तांदुला नदी के चयनित तीन किलोमीटर क्षेत्र में रिवर इकोसिस्टम संरक्षण एवं इको-रिवरफ्रंट डेवलपमेंट का कार्य किया जाएगा। ड्रोन तकनीक के माध्यम से हाई-रिजोल्यूशन सर्वे कर नदी की जलधारा, तट संरचना, जल गुणवत्ता, मौसमी परिवर्तन एवं जैव विविधता का विस्तृत अध्ययन किया जाएगा। इसके आधार पर वैज्ञानिक एवं व्यवहारिक मॉडल तैयार कर नदी को स्वच्छ, संतुलित और सतत स्वरूप प्रदान करने की दिशा में कार्य होगा।
जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग के सहयोग से संचालित इस महत्वाकांक्षी परियोजना में आईआईटी भिलाई इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी फाउंडेशन की विशेषज्ञ टीम तकनीकी विश्लेषण, वैज्ञानिक सत्यापन और फील्ड अध्ययन के आधार पर कार्ययोजना तैयार करेगी। इसके बाद तांदुला नदी से हीरापुर तक के क्षेत्र में सौंदर्यीकरण, जल संरक्षण, पारिस्थितिक संतुलन एवं जैव विविधता संरक्षण के कार्य किए जाएंगे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अध्यक्ष प्रतिभा चौधरी ने तांदुला नदी के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए जिला प्रशासन के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि जल्द ही तांदुला नदी नए स्वरूप में दिखाई देगी। वहीं अपर कलेक्टर चंद्रकांत कौशिक ने कहा कि ड्रोन सर्वेक्षण के माध्यम से नदी संरक्षण और पुनर्जीवन का सपना साकार होने जा रहा है। उन्होंने मानव सभ्यता एवं पर्यावरण संरक्षण में नदियों की महत्वपूर्ण भूमिका पर भी प्रकाश डाला।
कार्यक्रम का आभार प्रदर्शन कार्यपालन अभियंता पीयूष देवांगन ने किया। इस अवसर पर तहसीलदार आशुतोष शर्मा सहित अन्य अधिकारी एवं विशेषज्ञ मौजूद रहे।






