आमंत्रण हेरिटेज साहू सदन में दुर्लभ सत्संग का पंचम दिवस संपन्न

श्रद्धेय स्वामी श्री विजयानंद गिरि जी महाराज के ओजस्वी प्रवचन से श्रद्धालु भावविभोर आमंत्रण हेरिटेज साहू सदन में आयोजित दुर्लभ आध्यात्मिक सत्संग का आज पंचम दिवस श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक चेतना के वातावरण में संपन्न हुआ। सत्संग के प्रवचन कर्ता श्रद्धेय स्वामी श्री विजयानंद गिरि जी महाराज (ऋषिकेश वाले) ने अपने ओजस्वी और सरल वाणी में उपस्थित श्रद्धालुओं को जीवन का गूढ़ संदेश प्रदान किया। आज के सत्संग में प्रमुख रूप से सभी जगह भगवान है, इसलिए सभी का सम्मान करना चाहिए। स्वामी जी महाराज ने कहा कि ईश्वर केवल मंदिर, मूर्ति या तीर्थ तक सीमित नहीं हैं, बल्कि कण-कण में, जीव मात्र में और पूरे संसार में भगवान का वास है। जब मनुष्य इस सत्य को हृदय से स्वीकार कर लेता है, तब उसके व्यवहार में स्वतः ही करुणा, प्रेम, सहनशीलता और सम्मान का भाव आ जाता है। अपने प्रवचन को और अधिक प्रभावशाली बनाते हुए स्वामी जी ने भक्त प्रह्लाद और भक्त मीरा के जीवन प्रसंगों का अत्यंत सुंदर उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि—प्रह्लाद ने अत्याचार सहते हुए भी अपने पिता हिरण्यकश्यप के प्रति द्वेष नहीं रखा, क्योंकि वह हर जगह भगवान नारायण को देखते थे।मीरा ने लोक-लाज, समाजिक बंधनों और विरोध के बावजूद श्रीकृष्ण को ही सर्वस्व मानकर प्रेम और भक्ति का मार्ग नहीं छोड़ा। स्वामी जी ने कहा कि जब मनुष्य हर व्यक्ति में ईश्वर का अंश देखता है, तब भेदभाव, अहंकार और वैमनस्य स्वतः समाप्त हो जाते हैं और समाज में शांति व सद्भाव का विस्तार होता है।सत्संग के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और सभी ने पूरे ध्यान और श्रद्धा के साथ प्रवचन का श्रवण किया। वातावरण हरि नाम और भक्ति रस से सराबोर रहा।कार्यक्रम में यह भी जानकारी दी गई कि गीता प्रेस, गोरखपुर से प्रकाशित सभी प्रमुख धार्मिक एवं आध्यात्मिक पुस्तकें सत्संग स्थल पर उपलब्ध हैं, जिनमें श्रीमद्भगवद्गीता, रामचरितमानस, पुराण, उपनिषद एवं अन्य प्रेरक ग्रंथ शामिल हैं। श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में इन पुस्तकों को प्राप्त कर आध्यात्मिक ज्ञान अर्जित किया।आयोजकों ने बताया कि यह सत्संग कार्यक्रम आगे भी जारी रहेगा और अधिक से अधिक लोगों से इसमें सहभागी बनकर आध्यात्मिक लाभ लेने का आग्रह किया गया। सत्संग के पंचम दिवस का समापन भक्ति भाव, शांति और सद्भाव के संदेश के साथ हुआ, जिसने सभी उपस्थित जनों के हृदय में गहरी छाप छोड़ी।

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