मैनपाट की धरती पर खिला टाऊ का जादू! सफेद फूलों से सजी वादियां, किसानों की खुशहाली की बनीं पहचान।

रायपुर / मैनपाट . छत्तीसगढ़ का शिमला कहे जाने वाला मैनपाट अपनी खूबसूरती और ठंडे मौसम के साथ अब टाऊ की सफेद फूलों वाली फसल के लिए भी सुर्खियों में है. सरगुजा जिले के मैनपाट में उगाई जाने वाली यह खास फसल पूरे इलाके को मानो सफेद चादर से ढक देती है. इसकी खेती भारत में सिर्फ उत्तराखंड के बाद मैनपाट में ही होती है. चुकीं ये इलाका टाऊ की फसल के लिए अनुकूल हैं, शुरुआत तिब्बती समाज के लोगों ने की थी, लेकिन अब स्थानीय किसान भी बड़े पैमाने पर इसकी खेती कर रहे हैं और अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं. विदेशों में बढ़ती मांग के चलते टाऊ की खेती किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है ,

मैनपाट की धरती पर खिला टाऊ का फूल
छत्तीसगढ़ के उत्तरी इलाके सरगुजा में इन दिनों टाऊ की फसल अपने बेहतरीन दौर में है. खेतों में टाऊ के सफेद फूल खिलने लगे हैं, जो यहां आने वाले सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं. कई लोग फसल के बीच जाकर फोटो और सेल्फी लेते नजर आ रहे हैं. पहली बार मैनपाट घूमने आने वाले पर्यटक इन फूलों को देखकर हैरान रह जाते हैं और पूछते है आखिर यह फसल है क्या?

तिब्बती शरणार्थियों से शुरू हुई टाऊ की खेती
साल 1964 में जब तिब्बती शरणार्थी मैनपाट आए, तो उनके सामने भोजन और खेती का बड़ा सवाल था. ठंडे मौसम में कौन सी फसल उगाई जा सकती है यही चुनौती थी. ऐसे में तिब्बत से आए लोगों ने अपने देश की प्रसिद्ध टाऊ की फसल का बीज यहां बोया. शुरुआत में इसे सिर्फ खाने के लिए उगाया गया, लेकिन जब उत्पादन अच्छा हुआ, तो धीरे-धीरे इसे आय का जरिया बना लिया गया.

आज टाऊ की यह फसल न सिर्फ तिब्बतियों की पहचान बन चुकी है, बल्कि अब यादव, माझी और आदिवासी समाज के लोग भी इसकी खेती करने लगे हैं.

कम लागत, अधिक मुनाफा
कृषि विशेषज्ञ सिकंदर प्रजापति ने लोकल 18 को बताया कि टाऊ की खेती केवल मैनपाट में की जाती है. यह 90 दिन की फसल है, जिसमें कम लागत और कम मेहनत से अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है. इसमें गोबर खाद की मात्रा बहुत कम लगती है, हालांकि थोड़ी मात्रा डालनी जरूरी होती है. बीच-बीच में रासायनिक खाद का हल्का उपयोग फसल की गुणवत्ता को और बेहतर बना देता है. सितम्बर में बोवाई के बाद अक्टूबर में सफेद फूल खिलने लगते हैं, जो देखने में बेहद सुंदर होते हैं.

विदेशों में भी बढ़ी डिमांड
टाऊ की फसल की विदेशों में डिमांड लगातार बढ़ रही है. बाजार में इसका रेट पहले की तुलना में काफी बढ़ गया है.कम समय और कम मेहनत में अधिक लाभ मिलने के कारण किसान अब इसे मुख्य फसल के रूप में अपनाने लगे हैं.
साथ ही, टाऊ के खेत अब पर्यटन का नया आकर्षण बन चुके हैं ,जहां लोग फूलों के बीच फोटो खींचते हैं और मैनपाट की प्राकृतिक सुंदरता का आनंद उठाते हैं. साथ ही टाऊ कि फसल जब तैयार होता हैं तो इससे पूजा पाठ के लिए फलाहार बनाए जाते हैं जो प्रसाद के रूप में बनाया जाता है और आटा बनाया जाता है दलीया बनाया जाता है, सत्तू बनाकर खा सकते हैं.

सफेद फूलों की घाटी बना मैनपाट
मैनपाट की वादियों में नजर घुमाइए, जहां तक आंख जाए, वहां तक टाऊ की सफेद फसल लहराती दिखेगी. कह सकते हैं, यह फसल अब मैनपाट की पहचान और गर्व बन चुकी है. तिब्बती परंपरा से उपजी यह फसल आज छत्तीसगढ़ के किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण की कहानी लिख रही है.

ब्युरो रिपोर्ट

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