मुंबई: महाराष्ट्र में डिप्टी सीएम अजित पवार और आईपीएस अंजना कृष्णा के बीच तीखी बहस का मामला सुर्खियों में बना हुआ है। मामले के तूल पकड़ने के बाद हुई जांच में जहां आईपीएस अंजना कृष्णा को क्लीन चिट देते हुए अजीत के समर्थकों के खिलाफ सरकारी काम में बाधा डालने का केस दर्ज किया गया है। इस बीच महायुति में अकेले पड़े अजित पवार को भतीजे रोहित पवार से समर्थन मिला है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) से विधायक रोहित पवार ने कहा है कि मुझे लगता है कि यह भ्रम अजित दादा की हिंदी और उनकी बोलने की शैली के कारण हुआ। जिसे पूरा राज्य जानता है। अजित दादा पहले ही इस पर खेद व्यक्त कर चुके हैं। हालांकि इसके बावजूद कुछ कार्यकर्ताओं द्वारा मीडिया ट्रायल चलाया जा रहा है। इसके अलावा, राज्य नेतृत्व को उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए जिन पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं।
विवाद पर बंट गई पवार फैमिली
पवार फैमिली के अहम सदस्य रोहित ने जहां अपने चाचा के व्यवहार का समर्थन करते हुए बचाव की कोशिश की है तो वहीं बारामती से सांसद सुप्रिय सुले ने अजित पवार के उनके व्यवहार के लिए आलोचना की है। एनसीपी (SP) की कार्यकारी अध्यक्ष सुले ने कहा कि अगर राज्य में ईमानदार और प्रतिबद्ध सरकारी अधिकारियों को अनावश्यक रूप से परेशान किया गया तो उनकी पार्टी सड़कों पर उतरेगी। ऐसे में परिवार के अंदर भी आईपीएस अंजना कृष्णा के मुद्दे पर दो राय उभरी है। रोहित पवार ने यह भी आरोप लगाया कि महायुति दल एक-दूसरे पर हावी होने की होड़ में लगे हैं। उन्होंने दावा किया। महायुति दल राजनीतिक बदला लेने के लिए अपने ही नेता का मीडिया ट्रायल चला रहे हैं।
कोई ऐसे नहीं बनता आईपीएस
सुप्रिया सुले ने बुधवार को पुणे में कहा कि मेरिट के आधार पर कोई आईपीएस अधिकारी बनता है। लेकिन दुर्भाग्य से उनकी योग्यता पर संदेह जताया जा रहा है। वह शिक्षित हैं और 335वीं रैंक हासिल करने के बाद आईपीएस अधिकारी बनी हैं। वह अपनी योग्यता के दम पर अधिकारी बनी हैं, किसी और तरीके से नहीं। गौरतलब हो कि अजित पवार ने पिछले हफ्ते कथित अवैध खनन रोकने पहुंची आईपीएस अधिकारी को फटकार लगाई थी। उन्होंने कार्रवाई रोकने को कहा था। अधिकारी ने फोन कॉल पर अजित पवार को पहचानने से इनकार कर दिया था। इस पर अजित पवार ने आपा खो दिया था। अंजना कृष्णा ने उनके नंबर पर कॉल करने को कहा था। इस विवाद के तूल पकड़ने पर अजित पवार ने बाद में कहा था कि उनका इरादा क़ानून प्रवर्तन में दखल देने का नहीं था, बल्कि यह सुनिश्चित करना था कि जमीनी स्तर पर स्थिति शांत रहे और आगे न बढ़े।
रिपोर्ट में मिली क्लीन चिट
सोलापुर के जिला कलेक्टर ने कहा है कि तलाटी और पुलिस अपने कर्तव्यों का सही ढंग से पालन कर रहे थे। एनसीपी ने आईपीएस अधिकारी कृष्णा के खिलाफ जांच की मांग की थी, जबकि विपक्ष ने नैतिक आधार पर अजित पवार के इस्तीफे की मांग की थी। एनसीपी प्रवक्ता अमोल मिटकरी ने आईपीएस अधिकारी द्वारा संघ लोक सेवा आयोग को सौंपे गए दस्तावेजों की जांच की मांग की थी। हालांकि सुले ने एनसीपी की इस मांग को संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) का अपमान बताया। इस पूरे विवाद में रोहित पवार ने जहां अजित पवार का समर्थन किया है तो वहीं उनके सगे भतीजे भतीजे युगेंद्र पवार ने अपने चाचा की आलोचना की। उन्होंने कहा कि जिस तरह की बातचीत हुई, उसे कोई भी स्वीकार नहीं करेगा। आखिरकार वह एक आईपीएस अधिकारी हैं। वह एक महिला हैं। बोलने से पहले सोचना चाहिए। जो कुछ भी हुआ वह गलत था।
फडणवीस ने भी जताई नाराजगी
अजित पवार आईपीएस अधिकारी अंजना कृष्णा को फोन पर धमकाने के बाद विवादों में फंस गए हैं। इस मुद्दे पर उन्हें महायुति में शामिल सहयोगी दलों के नेताओं का साथ नहीं मिल रहा है। इस वजह से वे नाराज बताए जा रहे हैं। ऐसी रिपोर्ट है कि इस मामले में सीएम देवेंद्र फडणवीस ने भी अजीत के रवैए पर नाराजगी जताई है. उनका मानना है कि इस तरह के मामलों की वजह से जनता में अच्छा संदेश नहीं जाता है। उन्हें बीजेपी और शिंदे की शिवसेना से अपेक्षित सहयोग नहीं मिल रहा है। राज्य के गृह विभाग का जिम्मा खुद सीएम के पास है।
ब्युरो रिपोर्ट







