धमतरी। छत्तीसगढ़ में पोला पर्व का विशेष महत्व है। यह पारंपरिक कृषि पर्व खेती-किसानी, पशुधन और ग्रामीण जीवन से जुड़ी समृद्ध लोकपरंपराओं का प्रतीक है। इस अवसर पर किसान कृषि कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले बैलों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करते हैं। बैलों को सजाया जाता है और उनकी पूजा की जाती है। पोला पर्व किसानों और पशुधन के बीच के आत्मीय संबंध को दर्शाने के साथ ही हमारी कृषि संस्कृति और लोकपरंपराओं को आगे बढ़ाने का अवसर भी देता है। भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के जिला अध्यक्ष शुभांक मिश्रा ने जिले एवं प्रदेशवासियों को पोला पर्व की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि पोला हमारी ग्रामीण संस्कृति, किसानों के परिश्रम और पशुधन के सम्मान से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है। यह पर्व हमें अन्नदाता किसानों के योगदान को सम्मान देने और खेती-किसानी से जुड़ी परंपराओं के संरक्षण की प्रेरणा देता है। अपने शुभकामना संदेश में शुभांक मिश्रा ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान उसकी कृषि परंपराओं और मेहनतकश किसानों से है। किसान अपने परिश्रम से खेतों में अन्न उगाकर समाज के जीवन को आधार देते हैं। खेती-किसानी में बैलों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। पोला पर्व इसी योगदान के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है। यह पर्व हमें याद दिलाता है कि हमारी खुशहाली के पीछे किसानों की मेहनत और पशुधन का भी महत्वपूर्ण स्थान है। उन्होंने कहा कि पोला केवल एक पारंपरिक आयोजन नहीं, बल्कि किसान और पशुधन के बीच के आत्मीय संबंध का पर्व है। इस अवसर पर बैलों को सजाने और उनकी पूजा करने की परंपरा हमारी ग्रामीण संस्कृति की सादगी, संवेदनशीलता और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता को दर्शाती है। ऐसे पर्व समाज को अपनी जड़ों से जोड़ने और आने वाली पीढ़ियों तक लोकपरंपराओं को पहुंचाने का काम करते हैं। शुभांक मिश्रा ने कहा कि आज के समय में युवाओं की भूमिका अपनी संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण में महत्वपूर्ण है। युवाओं को चाहिए कि वे अपनी लोकसंस्कृति से जुड़ें, किसानों के योगदान को सम्मान दें और ग्रामीण जीवन की समृद्ध परंपराओं को आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभाएं। पोला पर्व हमें अपनी जड़ों से जुड़े रहने और समाज में परिश्रम, सम्मान तथा संवेदनशीलता की भावना को मजबूत करने की प्रेरणा देता है। भाजयुमो जिला अध्यक्ष ने कहा कि पोला पर्व किसानों के जीवन में खुशहाली लेकर आए और प्रदेश की कृषि संस्कृति सदैव समृद्ध होती रहे। उन्होंने जिले के सभी युवा साथियों एवं नागरिकों से आह्वान किया कि वे इस पावन अवसर पर किसानों के सम्मान, पशुधन के प्रति संवेदनशीलता और लोकपरंपराओं के संरक्षण का संकल्प लें। अंत में शुभांक मिश्रा ने ईश्वर से जिले एवं प्रदेश के सभी किसानों और परिवारों के लिए सुख, शांति, समृद्धि एवं खुशहाली की कामना करते हुए पोला पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं दीं।







