जब शिक्षक ने ठाना बदलाव, तो सरकारी स्कूल बना बच्चों की पहली पसंद

नवाचार, जनभागीदारी और समर्पण की मिसाल बने धमतरी के दो शिक्षक — राज्यपाल ने किया सम्मानित कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने कहा—इन शिक्षकों की पहल जिले के लिए गौरव और अन्य शिक्षकों के लिए प्रेरणास्रोत धमतरी। सरकारी स्कूलों की तस्वीर बदलने के लिए हमेशा बड़े संसाधनों की जरूरत नहीं होती, जरूरत होती है साफ नीयत, नई सोच और बच्चों के भविष्य के प्रति समर्पण की। धमतरी जिले के दो शिक्षकों ने इसी सोच को अपने कार्यों में उतारकर यह साबित किया है कि एक शिक्षक की पहल पूरे शिक्षा तंत्र में सकारात्मक बदलाव की शुरुआत बन सकती है।अपनी जेब से खर्च, अतिरिक्त समय, नवाचार और पालकों एवं शिक्षकों की सहभागिता को माध्यम बनाकर शासकीय प्राथमिक शाला धौराभाठा के शिक्षक लीलाराम साहू, शासकीय माध्यमिक शाला लुगे की शिक्षिका रंजीता साहू और शासकीय प्राथमिक शाला कोलियारी की शिक्षिका प्रीति शांडिल्य ने शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया है। इनके प्रयासों से न केवल सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या बढ़ी, बल्कि विद्यार्थियों को बेहतर अवसर और आधुनिक शैक्षणिक संसाधन भी मिले हैं।खेल-खेल में पढ़ाई, 23 बच्चे पहुंचे नवोदय और एकलव्य विद्यालय शासकीय प्राथमिक शाला धौराभाठा के शिक्षक  लीलाराम साहू ने बच्चों के लिए पढ़ाई को रोचक और सहज बनाने पर जोर दिया। उनके नवाचारों का असर ऐसा रहा कि जिस स्कूल में कभी सीमित संख्या में विद्यार्थी थे, वहां छात्र संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। खेल-खेल में शिक्षा और टीएलएम आधारित शिक्षण पद्धति से बच्चों में सीखने की रुचि बढ़ी।उनके मार्गदर्शन में पढ़ने वाले 23 विद्यार्थियों का चयन जवाहर नवोदय विद्यालय एवं एकलव्य विद्यालय के लिए हो चुका है। पढ़ई तुहर दुआर और टीएलएम आधारित शिक्षण में उनके कार्य को राज्य स्तर पर भी पहचान मिली है। शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए उनका चयन राज्यपाल पुरस्कार के लिए किया गया है।मैं हूं गुल्लक छोटी पहल से 150 स्कूलों तक पहुंची डिजिटल शिक्षा शासकीय माध्यमिक शाला लुगे की शिक्षिका श्रीमती रंजीता साहू ने अपने विद्यालय को डिजिटल बनाने का संकल्प लिया। संसाधनों की कमी को बाधा मानने के बजाय उन्होंने ‘मैं हूं गुल्लक’ अभियान शुरू किया और शिक्षकों एवं पालकों की सहभागिता से जिले के 150 विद्यालयों में स्मार्ट टीवी उपलब्ध कराने की पहल की।इसके अलावा उन्होंने लगभग 300 विद्यालयों में गणित वर्णमाला पहुंचाने तथा करीब 11 हजार बच्चों को पेन, कॉपी और किताबें उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके प्रयासों से अनेक स्कूलों में बच्चों को डिजिटल माध्यम से सीखने का अवसर मिला। शिक्षा में तकनीक और जनभागीदारी के अभिनव समन्वय के लिए उनका चयन भी राज्यपाल पुरस्कार के लिए किया गया है।इधर दृष्टिबाधित बच्चों के लिए 11 हजार से अधिक ऑडियो बुक्स, विश्व रिकॉर्ड में दर्ज हुआ नाम शासकीय प्राथमिक शाला कोलियारी की शिक्षिका प्रीति शांडिल्य ने समावेशी शिक्षा की दिशा में उल्लेखनीय पहल की। राष्ट्रपति पुरस्कृत शिक्षिका के. शारदा के नेतृत्व में राज्य के 30 शिक्षकों की टीम के साथ मिलकर उन्होंने दृष्टिबाधित बच्चों के लिए ब्रेल एवं ऑडियो आधारित शैक्षणिक सामग्री तैयार करने में योगदान दिया।इस प्रयास के तहत कक्षा 5वीं से 12वीं तक के दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए 11 हजार से अधिक ऑडियो बुक्स तैयार की गईं। यह शैक्षणिक सामग्री 400 से अधिक स्कूलों और 20 दृष्टिबाधित विशेष विद्यालयों तक पहुंचाई गई है। सामग्री को लाखों बार देखा-सुना जा चुका है और इस उल्लेखनीय कार्य का नाम ‘गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड’ में दर्ज हुआ है।कलेक्टर ने शाल-श्रीफल भेंट कर किया सम्मान इन तीनों शिक्षकों की उपलब्धियों को जिले के लिए गौरवपूर्ण बताते हुए कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने आज कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में लीलाराम साहू और रंजीता साहू को शाल-श्रीफल भेंटऔर प्रशस्ति पत्र दे कर सम्मानित किया। उन्होंने दोनों शिक्षकों को राज्यपाल पुरस्कार के लिए चयनित होने पर बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत जयंत नाहटा सहित जिला अधिकारी उपस्थित थे।कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने कहा कि धमतरी के इन शिक्षकों ने यह संदेश दिया है कि शिक्षा में बदलाव केवल संसाधनों से नहीं, बल्कि दृष्टिकोण, समर्पण और नवाचार से आता है। उन्होंने कहा कि सरकारी विद्यालयों को बच्चों और पालकों की पहली पसंद बनाने के लिए ऐसे सकारात्मक प्रयास अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इन शिक्षकों की उपलब्धियां जिले के लिए गर्व का विषय हैं और निश्चित रूप से अन्य शिक्षकों को भी नई पहल के लिए प्रेरित करेंगी। उन्होंने तीनों शिक्षकों को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। एक शिक्षक की पहल, अनेक बच्चों के सपनों की उड़ान धमतरी के इन शिक्षकों की कहानी केवल पुरस्कार और सम्मान की कहानी नहीं है। यह इस बात की मिसाल है कि जब शिक्षक अपने दायित्व को नौकरी से आगे बढ़ाकर मिशन बना लेता है, तो स्कूल की चारदीवारी के भीतर से बदलाव की ऐसी रोशनी निकलती है, जो बच्चों के सपनों को नई दिशा देती है। नवोदय और एकलव्य में पहुंचते बच्चे हों, डिजिटल शिक्षा से जुड़ते विद्यार्थी हों या दृष्टिबाधित बच्चों तक पहुंचती ऑडियो पुस्तकें इन प्रयासों ने सरकारी शिक्षा की संभावनाओं को नई पहचान दी है।

 

 

Recent Posts