“संपत्ति कर लेने के बावजूद भूमि प्रमाण पत्र लंबित, पालिका से उठे सवाल”

भूमि अनुज्ञा प्रमाण पत्र के लिए भटक रहे भूमि स्वामी, वर्षों से संपत्ति कर लेने के बाद भी पालिका नहीं कर रही समाधान

बालोद :– नगर पालिका परिषद बालोद द्वारा भूमि अनुज्ञा प्रमाण पत्र जारी नहीं किए जाने का मामला सामने आया है। ग्राम गंजपारा, वार्ड क्रमांक 12 निवासी प्रदीप चोपड़ा पिता मूलचंद चोपड़ा अपनी भूमि से संबंधित अनुज्ञा प्रमाण पत्र के लिए परेशान हैं। उनका कहना है कि संबंधित भूमि के संबंध में राजस्व न्यायालय द्वारा वर्ष 2020 में आदेश पारित किए जाने तथा नगर पालिका से अनापत्ति अभिमत प्राप्त होने के बावजूद आज तक आवश्यक प्रमाण पत्र जारी नहीं किया गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रदीप चोपड़ा के नाम पर तहसील बालोद अंतर्गत खसरा नंबर 866/24 में कुल 0.042 हेक्टेयर भूमि में से 0.0165 हेक्टेयर भूमि दर्ज है। इस संबंध में न्यायालय अनुविभागीय अधिकारी एवं सक्षम अधिकारी बालोद द्वारा राजस्व प्रकरण क्रमांक 2020092410000028/403 अ-2 वर्ष 2019-20 में 26 नवंबर 2020 को आदेश पारित किया गया था।
आदेश की प्रक्रिया के दौरान नगर पालिका परिषद बालोद द्वारा आपत्ति आमंत्रित करते हुए इश्तहार प्रकाशित कराया गया था, लेकिन निर्धारित अवधि में किसी प्रकार की आपत्ति प्राप्त नहीं हुई। वहीं मुख्य नगर पालिका अधिकारी, नगर पालिका परिषद बालोद द्वारा पत्र क्रमांक 1945/रावि/2019, दिनांक 18 सितंबर 2020 के माध्यम से आवेदित भूमि के व्यपवर्तन की अनुमति दिए जाने पर कोई आपत्ति नहीं होने का अभिमत भी दिया गया था।
वहीं नगर तथा ग्राम निवेश विभाग के मास्टर प्लान में संबंधित भूमि का उपयोग उद्यानिकी के लिए निर्धारित बताया गया है। दूसरी ओर राजस्व निरीक्षक की रिपोर्ट में उल्लेख किया गया कि आवेदित भूमि के आसपास सघन आबादी विकसित हो चुकी है तथा भूमि से आगे प्लॉट का डायवर्सन भी किया गया है।
संपत्ति कर लिया जा रहा है, फिर प्रमाण पत्र जारी करने में अड़चन क्यों?
प्रदीप चोपड़ा का कहना है कि नगर पालिका परिषद द्वारा विगत कई वर्षों से संबंधित मकान से संपत्ति कर एवं समेकित कर नियमित रूप से लिया जा रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब पालिका भवन से संबंधित कर लगातार वसूल रही है, तो भूमि अनुज्ञा प्रमाण पत्र जारी करने में आखिर क्या अड़चन है?
उन्होंने मांग की है कि पूरे मामले की संबंधित दस्तावेजों के आधार पर जांच कर स्पष्ट किया जाए कि प्रमाण पत्र जारी करने में देरी किस स्तर पर और किस कारण से हो रही है। साथ ही यदि किसी दस्तावेज या तकनीकी प्रक्रिया की कमी है तो उसकी स्पष्ट जानकारी संबंधित भूमि स्वामी को दी जाए, ताकि वह आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर सके।
अवैध कॉलोनियों में विकास कार्यों पर भी उठ रहे सवाल
इस मामले के साथ बालोद शहर में विकसित विभिन्न कॉलोनियों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि शहर में कई ऐसी कॉलोनियां हैं जिन्हें लंबे समय से अवैध कॉलोनी के रूप में जाना जाता है, लेकिन वहां नगर पालिका परिषद द्वारा सड़क, नाली सहित अन्य मूलभूत सुविधाओं के निर्माण पर सार्वजनिक धन खर्च किया गया है।
जनता के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि कोई कॉलोनी नियम विरुद्ध है तो वहां विकास कार्यों के लिए सार्वजनिक धन खर्च करने का आधार क्या रहा? और यदि वहां पालिका द्वारा मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, तो नियमानुसार भूमि एवं भवन संबंधी मामलों के निराकरण में आम नागरिकों को राहत क्यों नहीं मिल रही है?
जनहित में मांग है कि नगर पालिका परिषद बालोद पूरे मामले की पारदर्शी जांच कर भूमि अनुज्ञा प्रमाण पत्र जारी करने में आ रही वास्तविक बाधा को स्पष्ट करे तथा पात्र नागरिकों के लंबित मामलों का समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित करे।

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