धमतरी।आमंत्रण हेरिटेज, रुद्री में आयोजित दुर्लभ सत्संग का आज का सत्संग दिवस भक्तिमय वातावरण में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस पावन अवसर पर प्रवचनकर्ता श्रद्धेय स्वामी श्री विजयानंद गिरि जी महाराज ऋषिकेश वाले का दिव्य मार्गदर्शन उपस्थित श्रद्धालुओं को प्राप्त हुआ। स्वामी जी के ओजस्वी व प्रेरणादायी प्रवचनों से संपूर्ण परिसर राममय हो उठा। आज के सत्संग में स्वामी श्री ने प्रभु श्री रामचंद्र जी के प्रति शबरी के निष्काम प्रेम एवं पूर्ण समर्पण की भावपूर्ण व्याख्या की। उन्होंने बताया कि सच्ची भक्ति जाति, कुल अथवा विद्या की मोहताज नहीं होती, बल्कि प्रेम और श्रद्धा से ही प्रभु को पाया जा सकता है। शबरी के जीवन प्रसंग के माध्यम से स्वामी ने सरलता, सेवा और विश्वास का गूढ़ संदेश दिया। साथ ही, राजा बलि और भगवान वामन अवतार की कथा का सारगर्भित वर्णन करते हुए उन्होंने त्याग, दान और अहंकार के परित्याग का महत्व समझाया। स्वामी जी ने कहा कि जब मनुष्य अपने अहंकार को त्याग कर ईश्वर को समर्पित होता है, तभी उसे सच्चा कल्याण प्राप्त होता है। राजा बलि का उदाहरण आज भी मानव जीवन के लिए प्रेरणास्रोत है। सत्संग के दौरान आसपास के गांवों एवं नगर से आए सैकड़ों श्रद्धालुओं ने पूरे श्रद्धा भाव से कथा श्रवण कर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया। अंत में आयोजकों द्वारा सभी श्रद्धालुओं से कल होने वाले सातवें सत्संग दिवस में विशेष रूप से उपस्थित रहने का आग्रह किया गया, ताकि अधिक से अधिक लोग इस दुर्लभ सत्संग का पुण्य लाभ प्राप्त कर सकें। कार्यक्रम का समापन भजन-कीर्तन एवं जयघोष के साथ हुआ। संपूर्ण आयोजन शांत, सुव्यवस्थित एवं भक्तिभाव से परिपूर्ण रहा।







