कैमूर: बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दल-बदल का सिलसिला तेज हो गया है। इसी क्रम में कैमूर जिले में भारतीय जनता पार्टी (BJP) को एक बड़ा झटका लगा है, जब पार्टी के दो अनुभवी पूर्व विधायकों ने राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की सदस्यता ग्रहण कर ली। चैनपुर के पूर्व विधायक और पूर्व मंत्री बृज किशोर बिन्द और मोहनियां के पूर्व विधायक निरंजन राम ने बीजेपी को अलविदा कहकर तेजस्वी यादव के नेतृत्व में आरजेडी का दामन थाम लिया। तेजस्वी यादव ने खुद इन नेताओं के शामिल होने की तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर की हैं, जिससे राजनीतिक गलियारों में चर्चा का बाजार गर्म हो गया है।
बीजेपी के अंदर बवाल
चैनपुर से लगातार तीन बार बीजेपी के टिकट पर जीत हासिल करने वाले और दो बार मंत्री पद संभाल चुके बृज किशोर बिंद पिछले कुछ समय से पार्टी से नाराज चल रहे थे। उनकी नाराजगी का मुख्य कारण यह था कि 2020 में बसपा से सीट जीतकर जमा खान (जो बाद में जेडीयू में शामिल होकर अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री बने) के कारण चैनपुर सीट बीजेपी के खाते से काटकर जेडीयू को दे दी गई थी। अपनी पारंपरिक सीट छिन जाने की आशंका के चलते बृज किशोर बिंद ने पाला बदलने का मन बना लिया। अब माना जा रहा है कि वह आरजेडी के टिकट पर चैनपुर से चुनाव लड़ सकते हैं।
पूर्व विधायक हुए अलग
वहीं, मोहनियां सीट से दो बार बीजेपी के विधायक रह चुके निरंजन राम ने भी आरजेडी का रुख किया है। निरंजन राम ने पिछली बार यह सीट आरजेडी की संगीता कुमारी से हारी थी, जो हाल ही में बीजेपी में शामिल हो गई हैं। अपनी सीट पर किसी और की दावेदारी को देखते हुए, निरंजन राम ने आरजेडी में अपनी वापसी का रास्ता खोज लिया।
मंत्री की प्रतिक्रिया
अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री जमा खान ने इस दलबदल पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि एनडीए एक बड़ी पार्टी है और इन नेताओं को पूरा सम्मान दिया गया था, इसलिए इनके जाने से पार्टी पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कैमूर में बीजेपी का समीकरण इन दो नेताओं के जाने से बुरी तरह प्रभावित हो सकता है। चैनपुर क्षेत्र बिन्द बहुल है, और अगर आरजेडी बृज किशोर बिंद को टिकट देती है तो बीजेपी को सीट का नुकसान होना लगभग तय है। वहीं, मोहनिया में निरंजन राम पिछले चुनाव में हारने के बावजूद लोकप्रिय हैं, और अगर वह संगीता कुमारी के बीजेपी में शामिल होने से क्षेत्र में पनपे विरोध का फायदा उठा पाते हैं।
ब्युरो रिपोर्ट







