कविता बाबर ने सरकार से फसल क्षति पर मुआवजा व ऋण माफी की माँग की केंद्र की मोदी सरकार और राज्य की साय सरकार की किसानो के प्रति दोहरी नीति से किसान ऐसे ही परेशान है और अब आफ़त रूपी जो अर्नब तूफ़ान आया उससे तो किसान की कमर ही टूट गई है ऐसे समय में सरकार को चाहिये की अन्नदाताओं की समस्या को गंभीरता से ले और किसानों को तात्कालिक राहत प्रदान करे अभी पिछले तीन वर्षों में केंद्र की सरकार ने धान के दामों में बहुत ही कम वृद्धि मात्र ३८० रुपये की है जिसको राज्य सरकार को अपने चुनावी घोषणा ३१०० रुपये में जोड़कर किसानों को देना चाहिए साथ ही जो चक्रवाती तूफ़ान आया है जिसने किसानों की फसल को भारी क्षति पहुंचाई है उस पर तत्काल कार्यवाही होनी चाहिये सर्वे करवाकर बीमा योजना का लाभ दिलाए और किसानों ने सहकारी समितियों और बैंको सर जो ऋण लिया है उस ऋण माफी की घोषणा तत्काल करे और इस त्योहारी सीज़न में किसानों को राहत प्रदान करे सरकार की किसानो के लिये दोहरी नीति का पता इसी बात से चलता है कि पिछले वर्ष जिन किसानों ने एग्रीस्टेक पंजीयन करवाया था उसमे से बहुत से किसानों का नाम व रकबा अभी वर्तमान सूची से ग़ायब कर दिया गया है सरकार को चाहिये कि उन किसानों का नाम वापस उस सूची में जोड़ा जावे और जो नाम छूट गए हैं उनको वापस सूची में शामिल किया जाये बाबर ने कहा है कि किसान बहुत लगन और मेहनत से काम कर फसल लग तैयार करते हैं और ऐसे में उनके ऊपर विपत्ति आना चिंता का विषय है आज किसान को अपना भविष्य अंधकार मय लग रहा है ऐसे समय मे शासन की ज़िम्मेदारी है कि किसानों की समस्याओं का उचित समाधान कर राहत प्रदान करे






