मोदी सरकार में महंगाई डायन खाये जात है कविता योगेश बाबर

वर्तमान समय में भाजपा सरकार मोदी के नेतृत्व में देश अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक अव्यवस्था के दौर से गुज़र रहा है मोदी सरकार की विदेश नीति व अर्थनीति बिना स्टीयरिंग के वाहन की तरह चल रही है जिस पर सरकार का कोई भी नियंत्रण नहीं है रुपये का अवमूल्यन तेज़ी से हो रहा है व डॉलर का भाव दिन ब दिन बढ़ते ही जा रहा है जिसके परिणामस्वरूप देश के अंदर महँगाई अपनी चरम  की ओर बढ रही है समय रहते यदि सरकार द्वारा इस पर कोई ठोस नीति नहीं बनायी गई तो हमारे देश की अर्थव्यवस्था चरमराकर ढह जाएगी जिससे निम्न व मध्यम स्तर के जीवन यापन करने वाले नागरिकों के ऊपर बहूत ही दुष्प्रभाव पड़ने जा रहा है जो कि वर्तमान में परिलक्षित हो रहा है अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की नाकामी अब किसी से छिपी नहीं है देश की मीडिया व्यापारिक घरानों की कठपुतली बन चुकी है आम नागरिकों को सच्चाई से दूर रखकर झूठ का पुलिंदा परोसा जा रहा है कि विश्व गुरु का डंका बजाने का ढोंग करने वाली समस्त मीडिया एवं चैनलों के माध्यम से झूठ परोसा जा रहा है अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी विगत कुछ वर्षों से भारत की साख बहुत तेज़ी से गिरती जा रही है पिछले कुछ दिनों में उपभोक्ताओं के आम ज़रूरत की वस्तुओं का दाम बहुत तेज़ी से बढ़ा है जिसका दुष्प्रभाव निम्न और मध्यम वर्ग के लोगों के ऊपर तेज़ी से फैल रहा है आम जनता के दैनिक उपयोग की वस्तुएँ जैसे डीज़ल पेट्रोल खाद्य तेल और दूध फल सब्ज़ी के दाम बहुत तेज़ी से आसमान छू रहे हैं ये सब चीज़ें आम इंसान की पहुँच से दूर होती जा रही है केंद्र में बैठी भाजपा की मोदी सरकार अपना ध्यान सिर्फ़ चुनाव जीतने तक ही सीमित रखकर देश हित के बारे में कोई ठोस नीति व व्यापक दृष्टिकोण नहीं रख पा रही है आने वाला समय बहुत ही विस्फोटक स्वरूप धारण करने वाला है ऐसा दिखाई पड़ता है युवाओं के पास रोज़गार की कमी पेपर लीक होने की घटना महँगाई की मार इन सब वस्तुओ पर पड़ रहा है वर्तमान समय मे सबसे ज़्यादा पीड़ित भारत का किसान हो रहा है उनको उनकी उपज का सही दाम नहीं मिल पा रहा है डीज़ल पेट्रोल की उपलब्धता व दाम अनिश्चित हो चुकी है खाद व कीटनाशक की कमी व कालाबाज़ारी से किसान बहुत परेशान है मजदूर वर्ग भी इनकी ग़लत नीतियों की चपेट मे आ चुका है क्योंकि कांग्रेस की देन मनरेगा जैसी योजना जो की गाँव के लोगों को रोज़गार देने का काम करती थी आज उस योजना का नाम बदल कर स्वरूप बदल दिया गया है जो अभी तक लागू नहीं हुई है जिससे मज़दूर वर्ग अपने आपको ठगा महसूस कर रहा है सभी शासकीय संस्थानों का निजीकरण किया जा रहा है देश की आधी से अधिक संपत्ति चंद लोगों के हाथ में सौंपी जा रही है और विपक्ष के लोगो को डरा धमका कर कमजोर करने का काम वर्तमान सरकार कर रही है इन सब व्यवस्थाओं को सुधारने का काम अब आज की युवा पीढ़ी को आगे आकर करना होगा नहीं तो हमारा भारत देश आर्थिक गुलामी के कगार पर पहुँच जाएगा ।

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