
खुशनुमा माहौल में मनाई गई बकरीद, अमन-चैन व भाईचारे की मांगी गई दुआ

बालोद :– शहर में ईद-उल-अजहा (बकरीद) का त्यौहार गुरुवार को खुशनुमा और सौहार्दपूर्ण माहौल में मनाया गया। सुबह ईदगाह में बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के लोगों ने ईद की नमाज अदा की। जामा मस्जिद के इमाम-ओ-खतीब मोहम्मद शकील चिश्ती ने नमाज के बाद अवाम को संबोधित करते हुए कहा कि बकरीद पर की जाने वाली कुर्बानी का मकसद अल्लाह ताअला की कुरबत हासिल करना है। उन्होंने हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम और हजरत इस्माइल अलैहिस्सलाम की कुर्बानी का जिक्र करते हुए कहा कि अल्लाह की राह में दी गई कुर्बानी इंसान को त्याग, सब्र और इंसानियत का पैगाम देती है।

उन्होंने कहा कि कुर्बानी केवल जानवर को जिबह करना नहीं है, बल्कि इंसान को अपनी जिंदगी से तकब्बुर, हसद, बुग्ज, कीना और नफरत जैसी तमाम बुराइयों को भी दूर करना चाहिए। यही असली कुर्बानी है। उन्होंने कहा कि ईद का दिन शुक्राना अदा करने, खुशी बांटने और गरीबों व जरूरतमंदों की मदद करने का दिन है।

ईद की नमाज के बाद मुल्क और रियासत की तरक्की, अमन-ओ-अमान तथा आपसी भाईचारे के लिए खास दुआएं की गईं। नमाज के बाद लोगों ने एक-दूसरे से गले मिलकर ईद की मुबारकबाद दी। छोटे-बड़े और बुजुर्ग नए कपड़ों में ईदगाह पहुंचे, जिससे पूरा माहौल खुशियों से सराबोर नजर आया।
ईद के मौके पर इंतजामियां कमेटी के शाहिद खान ने मुस्लिम समाज को बकरीद की मुबारकबाद देते हुए पुलिस प्रशासन और नगर पालिका का आभार व्यक्त किया। वहीं नमाज के बाद बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग कब्रिस्तान पहुंचे और अपने मरहूमीन के लिए मगफिरत की दुआएं मांगी।

जामा मस्जिद के मुतवल्ली ने कहा कि बकरीद का पर्व हमें त्याग, भाईचारे और इंसानियत का संदेश देता है। समाज को आपसी मोहब्बत और सौहार्द के साथ मिलजुलकर रहना चाहिए। उन्होंने प्रशासन द्वारा किए गए व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए सभी से शांति और भाईचारे को बनाए रखने की अपील की।






