राज्य स्तरीय मंच पर ग्राम दर्री का गौरवपूर्ण सांस्कृतिक मंचन आरंग महोत्सव

के भव्य राज्य स्तरीय मंच पर ग्राम दर्री के लिए यह क्षण अत्यंत गौरव, सम्मान और आत्मगौरव से परिपूर्ण रहा, जब स्वतंत्र बाल समाज नाट्य मंडली, ग्राम दर्री ने अपनी अनुपम एवं भावपूर्ण नाट्य प्रस्तुति राजा मौरध्वज उर्फ शेर का भोजन का प्रभावशाली मंचन किया। यह नाटक केवल एक प्रस्तुति नहीं, बल्कि त्याग, बलिदान, भक्ति और आस्था की उस महान परंपरा का जीवंत चित्रण था, जिसने दर्शकों को आरंभ से अंत तक भाव-विभोर कर दिया। सशक्त अभिनय, सजीव एवं ओजपूर्ण संवाद, सधा हुआ निर्देशन तथा लोक संस्कृति से ओत-प्रोत भावनात्मक प्रस्तुति ने दर्शक दीर्घा को मंत्रमुग्ध कर दिया। नाटक के प्रत्येक दृश्य में कलाकारों का समर्पण और वर्षों की साधना स्पष्ट रूप से झलकती रही। यह उपलब्धि वर्षों की निरंतर मेहनत, अनुशासन और कला-साधना का प्रतिफल है, जिसके बल पर ग्राम स्तर से निकलकर स्वतंत्र बाल समाज नाट्य मंडली ने राज्य स्तरीय मंच पर अपनी सशक्त एवं विशिष्ट पहचान स्थापित की। मार्गदर्शन और सहयोग की महत्वपूर्ण भूमिका आरंग महोत्सव जैसे प्रतिष्ठित आयोजन में यह ऐतिहासिक अवसर दयाराम साहू पूर्व महामंत्री, प्रदेश साहू संघ, छत्तीसगढ़ के विशेष प्रयासों, मार्गदर्शन एवं सहयोग से संभव हो सका। उनके सतत प्रोत्साहन और कला के प्रति गहरी समझ के कारण नाट्य मंडली को राज्य स्तरीय मंच पर अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर प्राप्त हुआ। उनके योगदान को नाट्य मंडली एवं समस्त ग्रामवासियों द्वारा कृतज्ञता के साथ स्मरण किया गया। आरंग की पावन भूमि और राजा मौरध्वज की गाथा ग्राम दर्री की नाट्य कला ने मोरध्वज (राजा मौरध्वज) की पावन भूमि आरंग में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। आरंग वह ऐतिहासिक और धार्मिक नगर है, जहाँ पौराणिक मान्यताओं के अनुसार साक्षात भगवान ने राजा मौरध्वज एवं रानी पद्मावती से उनके एकमात्र पुत्र ताम्रध्वज का दान माँगा था। यहीं से इस नगर का नाम आरा अंग = आरंग पड़ा। राजा मौरध्वज की गाथा त्याग, बलिदान और भक्ति की चरम पराकाष्ठा का प्रतीक है। पुत्र को आरे से चीरकर भोजन बनाने और उसे भगवान को अर्पित करने का दृश्य अत्यंत करुण, मार्मिक एवं हृदय को द्रवित कर देने वाला है। यह प्रसंग अंततः एक दिव्य परीक्षा सिद्ध होता है, जिसमें भगवान स्वयं भक्त की भक्ति से प्रसन्न होकर प्रकट होते हैं। इसी महान कथा के कारण यह क्षेत्र आज बाघेश्वर महादेव धाम के रूप में विख्यात पवित्र तीर्थ स्थल है। सम्मान एवं विशेष सराहना इस उत्कृष्ट प्रस्तुति को कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, सांसद बृजमोहन अग्रवाल, विधायकगण, निगम–मंडल, बोर्ड, आयोग के अध्यक्षगण तथा कला जगत के प्रख्यात विद्वानों से विशेष सराहना एवं सम्मान प्राप्त हुआ। विशेष रूप से हाथरस की प्रसिद्ध नाट्य शैली भक्त राजा मौरध्वज उर्फ शेर का भोजन में उल्लेखित रागों एवं शास्त्रीय परंपराओं के अनुरूप मंचन करना अत्यंत चुनौतीपूर्ण कार्य था, जिसे कलाकारों ने पूर्ण सफलता के साथ निभाया। इस उपलब्धि में दशरथ साहू उम्र ८० वर्ष का ब्यास कवि के रूप में योगदान अत्यंत प्रशंसनीय रहा। जिनका इस उम्र में बिना चश्मा, बिना दांत के, रागों के गहन जानकार होने के कारण उन्होंने न केवल कलाकारों का मार्गदर्शन किया, बल्कि दर्शक दीर्घा को रागों की जानकारी देकर तालियों की गूंज के साथ प्रस्तुति को विशेष सम्मान भी दिलाया। यह हम सभी के लिए हर्ष का विषय है कि आगामी अप्रैल माह में पुनः आरंग में मंचन का सुअवसर प्राप्त हो रहा है। अब यह दायित्व हमारे कलाकार साथियों पर है कि वे इस सांस्कृतिक गरिमा को और अधिक ऊँचाइयों तक पहुँचाएँ तथा ग्राम दर्री की पहचान को राज्य और राष्ट्र स्तर तक स्थापित करें।संगीत पक्ष दशरथ लाल साहू प्रकाश साहू पं. भीखम शुक्ला शंकरदास मानिकपूरी योगेश चक्रधारी धर्मेंद्र चक्रधारी ईश्वरी चक्रधारी पात्र गण राजकुमार कुंभकार डॉ. मनोहर चक्रधारी दुर्योधन साहू अशोक सर्वा चैन सिंह चक्रधारी रविशंकर कुंभकार डेमन लाल चक्रधार हिलेश्वर चुम्म खूबलाल चोवा राम राकेश लोकेश्वर राजाराम साज–सज्जा घनश्याम चक्रधार नारद चक्रधारी यशवंत चक्रधारी बहुर सिंह चक्रधारी पर्दा मेन नंदकुमार कुंभकार सहदेव चक्रधारी इंद्रावण साहू खूबलाल साहू सहयोगी कलाकार छत्रपाल साहू तमेश सर्वा महेंद्र कुंभकार खोमेश चक्रधारी डॉ. महेंद्र चक्रधारी अश्वनी मंडावी पप्पू सर्वा खिलेश्वर चक्रधारी उपेन्द्र कुंभकार डीकेश चक्रधारी विशेष सहयोग दयाराम साहू टेकाराम कुंभकार पंडित ललित शुक्ला नमन मिश्रा (तारेंद) विशु चक्रधारी

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