बीसीएस शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में विधि विभाग द्वारा किया गया, 3rd सेमेस्टर के स्टूडेंट के सेमिनार का आयोजन

अधिवक्ताओं के विशेष अधिकार एवं लोकहितवाद द्वारा गरीबों तक न्याय की पहुंच, दिया गया सेमिनार का टॉपिक कॉलेज के प्राचार्य विनोद पाठक, सब्जेक्ट प्रोफेसर डॉक्टर सपना ताम्रकर, HOD दुर्गेश प्रसाद, प्रोफेसर पंकज जैन, प्रोफेसर कोमल यादव की उपस्थिति में हुआ सेमिनार धमतरी जिले के बीसीएस शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में विधि विभाग द्वारा एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया.. जिसमें थर्ड सेमेस्टर में पढ़ रहे सभी छात्र-छात्राओं को सेमिनार का एक विशेष टॉपिक दिया गया था जिसमें अधिवक्ताओं के विशेष अधिकार एवं लोकहीतवाद द्वारा गरीबों तक न्याय की पहुंच का टॉपिक में 5 मिनट हर स्टूडेंट को अपने विचार व्यक्त करने का समय दिया गया था और बारी-बारी से सभी 80 से ऊपर छात्र-छात्राओं ने अपने शब्दों में सेमिनार के टॉपिक में विचार व्यक्त किया.. वही इस कार्यक्रम की शुरुआत विषय विशेषज्ञ के रूप में उपस्थित डॉक्टर सपना ताम्रकार ने की वही इस सेमिनार में मुख्य अतिथि के रूप में शासकीय बाबू छोटेलाल श्रीवास्तव स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ विनोद पाठक मौजूद रहे साथ ही, कॉलेज के विधि विभाग के विभाग अध्यक्ष प्रोफेसर दुर्गेश प्रसाद, विषय विशेषज्ञ प्रोफेसर डॉ. सपना ताम्रकार,प्रोफेसर कोमल यादव, प्रोफेसर पंकज जैन उपस्थित रहे वही इस सेमिनार में विधि विभाग के सभी छात्र-छात्राओं ने सेमिनार के विशेष टॉपिक पर अपने अलग-अलग शब्दों में विचार व्यक्त किया और अधिवक्ताओं के विशेष अधिकार लोकहितवाद की उपयोगिता और आर्थिक रूप से कमजोर,निर्धन,गरीब वर्गों तक न्याय पहुंचने में कानून की भूमिका जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विशेष फोकस दिया गया वही अधिवक्ताओं के विशेष अधिकार जिसमें वकीलों को अपना काम स्वतंत्रता के साथ बिना डर के करने के लिए कुछ विशेष कानूनी अधिकार मिलने न्यायालय में अपने क्लाइंट का पक्ष बेबाकी से रखकर न्याय दिलाने में मदद करने और उन्हें दिए गए अधिकारों के जरिए न्याय व्यवस्था को मजबूत बनाने, और लोकहित वाद को जनहित याचिका Pl L जिसके जरिए उन गरीबों और जरूरतमंदों को न्याय दिलाना है.. जो पैसों की कमी या किसी अन्य कारणों से खुद न्यायालय नहीं जा सकते.. इसके माध्यम से कोई भी व्यक्ति समाज की भलाई के लिए न्यायालय में याचिका दायर कर सकता है.. चाहे वह गरीब और कमजोर लोगों को अपने अधिकारों की रक्षा करने में मदद मिलती है.. लोकहितवाद न्याय को आम लोगों तक पहुंचाने का एक महत्वपूर्ण मध्याम बताया गया वहीं इसकी ऐतिहासिक शुरुआत भारत में 1980 के दशक में न्यायमूर्ति पीएन भगवती, और न्यायमूर्ति वी आर कृष्ण अय्यर ने शुरुआत की थी वही शासकीय बाबू छोटेलाल श्रीवास्तव स्नातकोत्तर महाविद्यालय धमतरी के विधि विभाग में प्रोफेशनल एथिक्स की अंतर्गत सेमिनार आयोजित किया गया था.. जिसमें थर्ड सेमेस्टर के छात्र-छात्राओं की 100% उपस्थित रही जिसमें अंशुलिका पॉल, आशीष शर्मा,भास्कर राव पंढेर ,चंचल देवांगन, निलेश कुमार साहू, निलेश कुमार पटेल, पूर्णिमा देवी पंढेर, पूनम शुक्ला, पुष्पांजलि साहू, साक्षी शर्मा, समीर शर्मा, सुमित कुमार, शंकर राजपूत,उपेंद्र साहू,डागेश्वर साहू,नोमेश साहू, योगेंद्र कुमार, यशिका वाधवानी, यामिनी,यामन कुमार, विक्रम सिंह, वंदना सिन्हा, वैभव कुमार, उमाशंकर, उमा भारती, टीनम सोनकर, टिकेंद्र कुमार, ट्विंकल साहू, तेजेश्वर कुमार, सुषमा मिनपाल, सुजीत,सोनम, साहनी, शिवीना कोसले, राहुल, नितेश कुमार सिन्हा,नाजमीन खान, मोक्ष साहू, मोहित कुमार, मीनाक्षी यादव, मेघराज,मनीषा, मनीष कुमार, लोकेश कुमार,लोचना साहू, ली,खोमन लाल, करण देवांगन, कल्पना साहू, यीशु कुमार, ईशा इंद्रमन, हेमंतदेवांगन, हर्षसाहू, गायत्री साहू, गणेश राम,दुष्यंत कुमार, डोमेश्वरी, दीपेश कुमार ध्रुव, दिनेश्वरी,डीकेश्वरी,ध्वजा मत्स्यपाल,दामन लाल,दालतन फूल जी,चंद्रिका सोनकर, चंद्रमणि गजपाल, भूषण लाल,भूपेंद्र कुमार वाल्मीकि, अंजली यादव, अनिल कुमार, अनिकेत अग्रवाल,अनिल , आलोक सिंह,आकाश कुमार, अजय नाथ, ऐश्वर्या, आयुष चावला, के साथ समस्त छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित रहे

 

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