“महुआ पेड़ विवाद: पिता-पुत्र को 5-5 साल की सजा”

महुआ पेड़ विवाद में चाचा-चाची पर टंगिया से हमला, पिता-पुत्र को 5-5 साल की सजा

बालोद :– महुआ के सूखे पेड़ को काटने से मना करने पर चाचा-चाची पर टंगिया से जानलेवा हमला करने के मामले में एफटीसी न्यायालय बालोद ने पिता-पुत्र को दोषी करार देते हुए 5-5 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। यह फैसला 8 जुलाई 2026 को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ताजुद्दीन आसिफ की अदालत ने सुनाया।
न्यायालय ने आरोपी पंचराम गौर उर्फ पंचू (65 वर्ष) एवं उसके पुत्र उदय राम गौर उर्फ झीटू (38 वर्ष), दोनों निवासी बीचपारा चिखली, थाना डौण्डी, जिला बालोद को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 118(1) के तहत 6 माह का सश्रम कारावास एवं 100 रुपये अर्थदंड, धारा 118(2) के तहत 1 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 200 रुपये अर्थदंड तथा धारा 105 के तहत 5 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 500 रुपये अर्थदंड से दंडित किया। सभी सजाएं नियमानुसार प्रभावी रहेंगी।
न्यायालय ने समुचित जांच के बाद पीड़ित क्षतिपूर्ति योजना-2018 के तहत पीड़ित पक्ष को प्रतिकर प्रदान करने के लिए सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बालोद को आदेश की प्रति प्राप्त होने से दो माह के भीतर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए हैं।
अभियोजन के अनुसार, 16 फरवरी 2025 को प्रार्थी अनिल कुमार गौर ने थाना डौण्डी में शिकायत दर्ज कराई थी कि उसके पिता निकराम गौर और बड़े पिता पंचराम गौर के बीच संपत्ति का बंटवारा हो चुका है। घटना के दिन पंचराम और उसका पुत्र उदयराम खेत की मेड़ पर लगे सूखे महुआ के पेड़ को काट रहे थे। जब निकराम गौर, उनकी पत्नी बरतनीन बाई और बहू निर्मला बाई ने उन्हें रोकने का प्रयास किया, तब पंचराम ने अपने पुत्र उदयराम को तीनों को टंगिया से मार डालने के लिए उकसाया।
इसके बाद उदयराम ने टंगिया से हमला कर निकराम गौर, बरतनीन बाई और निर्मला बाई को गंभीर रूप से घायल कर दिया। घायलों को तत्काल शासकीय अस्पताल डौण्डी में भर्ती कराया गया। मामले में थाना डौण्डी ने अपराध दर्ज कर विवेचना प्रारंभ की।
प्रकरण की विवेचना उपनिरीक्षक उमा ठाकुर ने की। न्यायालय में अतिरिक्त लोक अभियोजक सनद कुमार श्रीवास्तव ने अभियोजन पक्ष की पैरवी की। न्यायालय ने प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर दोनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उपरोक्त सजा सुनाई।

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