मोदी जी ने जनता से त्याग मांगे यह उनके नाकामी का सबूत हैं :- तारिणी चंद्राकर

प्रधानमंत्री मोदी की कल देशवासियों से की गयी अपील को लेकर जिला कांग्रेस अध्यक्ष तारिणी चंद्राकर नें इसे देशवासियों के जख्मों पर नमक डालने वाला उपदेश बताया हैं. पिछले 2 माह से डीजल, पेट्रोल, गैस के संकट से जूझ रही तथा महंगाई की मार झेल रहे जनता से प्रधानमंत्री ने कहा की किसान खेती में उर्वरक का उपयोग कम करें, कामकाजी वर्ग वर्क फॉर्म होम करिए, खाद्य तेल कम उपयोग करे, गैस का उपयोग कम करे, सोना मत खरीदे, विदेश यात्रा मत करे. मोदी सरकार के गलत नीतियों के कारण देश की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से तबाह हो चुकी हैं. डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार गिरता जा रहा है विदेशी मुद्रा भंडार लगातार नीचे आता जा रहा है. भाजपा सरकार की आर्थिक विफलताओं की खामियाजा आज देश की गरीब और मध्यम वर्गीय जनता भुगत रही है. और केंद्र सरकार प्रचार प्रसार में व्यस्त हैं. देश की जनता को उपदेश देने वाले मोदी जी स्वयं सैकड़ो गाड़ियों की काफिले के साथ कहीं रोड शो कर रहे हैं तो कहीं राज्यों के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हो रहे हैं. पहले भाजपाई, मंत्री, विधायक, पदाधिकारी, साइकिल से चले डीजल-पेट्रोल बचाये। प्रधानमंत्री की सलाह पर अमल पहले उनके दल के लोगों को करना चाहिए, उसके बाद आम जनता से अपेक्षा करे। अपना तथा अपने मंत्रियो, मुख्यमंत्रियो, राज्य के मंत्रियो के काफिले को खत्म करें। आगे कहा की मोदी जब से प्रधानमंत्री बने है उन्होने विदेश यात्रा पर सैकड़ो करोड़ रुपये फूँक डाले हैं. 15 तारीख से वे फिर विदेश यात्रा पर जा रहे है। देश के पहले ऐसे प्रधानमंत्री है जो राष्ट्र की उत्पादकता को कम करने पर तुले हुए है. प्रधानमंत्री उर्वरक की व्यवस्था करने के बजाय बार-बार किसानों से यूरिया की खपत कम करने की अपील करते रहे है। किसानों की आय दुगुनी करने का वादा था लेकिन उर्वरक नहीं मिलने तथा महंगा उर्वरक खरीदने के कारण किसान कर्जदार हो रहे, उत्पादकता घट रही। आगे कहा की देश की महिलाओं के मंगलसूत्र छीनने का डर दिखाने वाले मोदी ने देश की महिलाओं के मंगलसूत्र ही नहीं अंगूठी, मांगटीका, हार, सोने की चैन सब कुछ छीनना चाह रहे। जब मनमोहन सरकार थी तब देश दुनिया की चौथी बडी अर्थव्यवस्था थी, मोदी राज में यह 6 वें स्थान पर पहुंच गया है। वास्तविकता तो यह है कि प्रधानमंत्री मोदी से देश नहीं संभल रहा हैं, देश ने पहले भी अनेकों ऐसे संकट देखे है, तब भारत की तत्कालीन सरकारों ने सूझबूझ से इन समस्याओं का सामना किया था। जब स्थितियां नहीं संभल रही तो मोदी जी देश की जनता से कम उपयोग की अपील कर रहे है।

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